भारत ने कहा-संयम बरतें, चीन-रूस ने क्या कहा?

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लेंस डेस्‍क। ईरान पर अमेरिका और इजराइल की ओर से किए गए सैन्य हमलों को लेकर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि जब तक जरूरी होगा, यह जंग जारी रहेगी। इसके अलावा उन्होंने कहा है कि ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई मारे जाने की संभावना है। हालांकि ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस दावे को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि खामेनेई बिल्कु सुरक्षित हैं।

इससे पहले नेतन्याहू ने खामेनेई के मारे जाने पर दावा किया था कि ऐसे बहुत से संकेत मिले हैं, जिससे यह पता चल रहा है कि खामेनेई मारे गए। इसके अलावा कई न्यूक्लियर अधिकारी भी मारे गए हैं। इस जंग से स्थाई शांति आएगी। उन्होंने ईरान के लोगों से सड़कों पर निकलने की अपील की है।

नेतन्याहू के बयान के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान को बहुत नुकसान हुआ है। लंबे समय तक यह ऑपरेशन चल सकता है। या दो तीन दिन में भी खत्म कर सकते हैं। इसके अलावा उन्होंने कहा कि इस नुकसान से उबरने में ईरान को बहुत समय लगेगा।

इससे पहले दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ पर ईरान ने अपनी नौसेना और मिसाइलों का पहरा बैठा दिया है। ईरान ने इसे बंद करने का ऐलान किया है। दूसरी तरफ ईरान ने बहरीन के रिहायशी इलाकों में हमला किया है। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान और इजरायल के विदेश मंत्री से बात की है।

इजराइल और अमेरिका के हमलों के बाद ईरान में भारी जनहानि की खबर सामने आई है। ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी के अनुसार, हमलों में अब तक कम से कम 201 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 747 लोग घायल हुए हैं। यह जानकारी रेड क्रिसेंट के प्रवक्ता ने मेहर न्यूज एजेंसी को दी है। इजरायल ने दावा किया है कि उसके 2 सौ फाइटर जेट ने 5 सौ से ज्यादा ठिकानों पर हमला किया है।

इस हमले को लेकर भारत सरकार ने अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हो रही ताजा घटनाओं से भारत अत्यंत चिंतित है। वहीं रूस और चीन ने सबसे तीखी निंदा की है। उधर ईरान ने बहरीन के रिहायशी इलाकों में हमला किया है।

ईरान की अर्धसरकारी तसनीम न्यूज एजेंसी ने रिपोर्ट की है कि इजरायल ने ईरान के दो स्‍कूलों पर हमने किए हैं, जिसमें मरने वालों की संख्या बढ़कर 85 हो गई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हमले की एक तस्वीर साझा की, जिसमें उन्होंने कहा कि लड़कियों का स्कूल नष्ट हो गया और बच्चे मारे गए।

भारत के विदेश मंत्रालय ने सभी संबंधित पक्षों से अपील की है कि वे संयम बनाए रखें, स्थिति को और बिगड़ने से रोकें। आम लोगों की जान-माल की सुरक्षा को सबसे ऊपर रखें। बयान में जोर दिया गया है कि तनाव कम करने और मूल समस्याओं के हल के लिए बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों का सहारा लिया जाना चाहिए। बयान में कहा गया है,“संवाद और कूटनीति से तनाव कम किया जाए। सभी राज्यों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान हो।”

भारत ने साफ किया कि सभी राष्ट्रों की संप्रभुता और सीमाओं की अखंडता का पूरा सम्मान होना जरूरी है। इसके अलावा, क्षेत्र में मौजूद भारतीय दूतावास और मिशन वहां रह रहे भारतीय नागरिकों से लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने सुरक्षात्मक सलाह जारी की है, जिसमें लोगों से सतर्क रहने, दूतावास से जुड़े रहने और स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की सिफारिश की गई है।

US Israel-Iran War: रूस और चीन ने क्‍या कहा

रूसी विदेश मंत्रालय ने हमलों को पूर्व-नियोजित और उकसावे के बिना सशस्त्र आक्रामकता बताया, जो एक संप्रभु संयुक्त राष्ट्र सदस्य राज्य के खिलाफ की गई है।

मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका और इजरायल ईरान के परमाणु कार्यक्रम की आड़ में शासन परिवर्तन का लक्ष्य रख रहे हैं। हमलों से क्षेत्र में मानवीय, आर्थिक और संभवतः रेडियोलॉजिकल आपदा का खतरा है, जिससे मध्य पूर्व ‘अनियंत्रित वृद्धि की खाई’ में धंस रहा है।

रूस ने तत्काल हमले रोकने और कूटनीति पर लौटने की मांग की। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने ईरानी समकक्ष अब्बास अरागची से फोन पर बात की और शांति समाधान में मदद की पेशकश की। रूस ने ईरान और इजरायल दोनों के लिए उड़ानें निलंबित कर दीं।

चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए। चीन ने तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकने, तनाव न बढ़ाने और संवाद-वार्ता फिर शुरू करने की अपील की। बीजिंग ने मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया। कुछ रिपोर्ट्स में चीन के ईरान को ड्रोन और मिसाइल सपोर्ट की खबरें भी आई हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर केवल कूटनीतिक समर्थन और संयम की बात कही गई।

अन्य देशों की प्रतिक्रियाएं

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक दार ने ‘अनुचित हमलों’ की कड़ी निंदा की और तत्काल वृद्धि रोकने और कूटनीति से समाधान की मांग की। यूरोपीय संघ (EU) के उच्च प्रतिनिधि काजा कलास ने घटनाक्रम को ‘खतरनाक’ बताया।

EU ने नागरिकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने की अपील की। फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन ने संयुक्त बयान में ईरान के जवाबी हमलों की निंदा की, लेकिन अमेरिका-इजरायल हमलों पर चुप्पी साधते हुए US-ईरान वार्ता फिर शुरू करने की मांग की। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने UN सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की।

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुतेरेश ने हमलों की निंदा की और कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को कमजोर कर रहा है। UN मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने भी संयम और नागरिक सुरक्षा की अपील की। सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई गई।

तुर्किये ने सभी पक्षों से हिंसा का चक्र तोड़ने की अपील की, जो US-इजरायल हमलों से शुरू हुआ। वहीं ऑस्ट्रेलिया ने हमलों का समर्थन किया, कहा कि ईरान के परमाणु हथियार रोकने के लिए जरूरी था। सऊदी, UAE, कतर, बहरीन, कुवैत ने ईरान के जवाबी हमलों की कड़ी निंदा की है और जवाबी कार्रवाई का इरादा जताया है।





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