महानदी नदी जल विवाद निपटाने ओडिशा की टीम करेगी छत्तीसगढ़ का दौरा

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लेंस डेस्‍क। Mahanadi river water dispute: ओडिशा सरकार ने महानदी नदी के जल बंटवारे के लंबे समय से चले आ रहे विवाद को सुलझाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। उपमुख्यमंत्री के.वी. सिंह देव की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति छत्तीसगढ़ का दौरा करने वाली है। यह दौरा 31 जनवरी से शुरू होगा, जो दो दिन तक जारी रहेगा। इस दौरे का मकसद पड़ोसी राज्य के साथ बातचीत करके मुद्दे पर आम सहमति बनाना है।

इससे पहले 23 जनवरी को भुवनेश्वर में एक बैठक बुलाई गई। उपमुख्यमंत्री सिंह देव ने बताया कि इस बैठक के निष्कर्षों के आधार पर ही छत्तीसगढ़ के सामने ओडिशा अपना पक्ष रखेगी। साथ ही महानदी से जुड़े सामाजिक संगठनों से भी चर्चा की जाएगी, ताकि सभी पक्षों की राय को शामिल किया जा सके।

महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल (MWDT) की अगली सुनवाई 7 फरवरी को होनी है, जिसमें दोनों राज्य अपने तर्क पेश करेंगे। न्यायाधिकरण का गठन 12 मार्च 2018 को हुआ था और इसकी अवधि 13 मार्च 2026 को समाप्त हो रही है।

ओडिशा सरकार ने केंद्र से इसकी अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया है, ताकि फैसला देने की प्रक्रिया पूरी हो सके। कुछ रिपोर्टों के अनुसार न्यायाधिकरण ने दोनों राज्यों से संयुक्त आवेदन न देने पर चिंता जताई है।

समिति की बैठक में राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी, कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन, बीजेडी विधायक निरंजन पुजारी, कांग्रेस विधायक सोफिया फिरदौस और सत्ताधारी दल के मुख्य व्हिप सहित अन्य शामिल हुए थे। यह प्रयास दोनों राज्यों के बीच बातचीत के माध्यम से विवाद सुलझाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, हालांकि विपक्ष ने कुछ मुद्दों पर श्‍वेत पत्र जारी करने की मांग भी की है।

Mahanadi river water dispute: क्‍या है विवाद

ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच महानदी नदी जल बंटवारा विवाद एक लंबे समय से चला आ रहा अंतर-राज्यीय जल विवाद है। महानदी भारत की प्रमुख नदियों में से एक है, जो छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के सिहावा पर्वत से निकलती है और ओडिशा से होकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है।

इस नदी का अधिकांश ऊपरी हिस्सा छत्तीसगढ़ में और निचला हिस्सा ओडिशा में है। यह विवाद 1936 से चला आ रहा है (जब हीराकुड बांध की योजना बनी थी), लेकिन 2016 में ओडिशा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसके बाद केंद्र सरकार ने 2018 में महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल (Mahanadi Water Disputes Tribunal – MWDT) का गठन किया। यह इंटर-स्टेट रिवर वॉटर डिस्प्यूट्स एक्ट, 1956 के तहत हुआ था।

ओडिशा का दावा: छत्तीसगढ़ में महानदी और उसकी सहायक नदियों पर कई बैराज, एनिकट और डायवर्जन प्रोजेक्ट्स बनाए जा रहे हैं, जिससे ओडिशा में आने वाला पानी कम हो रहा है। इससे हीराकुड बांध (ओडिशा का सबसे बड़ा बांध) का जल स्तर घट रहा है, डेल्टा क्षेत्र में सूखा पड़ रहा है, सिंचाई प्रभावित हो रही है, और बाढ़/सूखे की समस्या बढ़ रही है। ओडिशा का कहना है कि इससे उसके लाखों किसानों और लोगों को नुकसान हो रहा है।

छत्तीसगढ़ का पक्ष: छत्तीसगढ़ कहता है कि वह अपनी हिस्सेदारी के अनुसार पानी का उपयोग कर रहा है, मुख्य रूप से सिंचाई, पीने के पानी और औद्योगिक जरूरतों के लिए। उसका तर्क है कि ऊपरी इलाके में विकास के लिए प्रोजेक्ट्स जरूरी हैं और ओडिशा को पर्याप्त पानी मिल रहा है।



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