ITSA Hospital ने हेल्थ चेकअप पर दिया दुबई टूर जैसा लुभावना ऑफर

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक निजी अस्पताल ITSA Hospital ने स्वास्थ्य जांच को आकर्षक बनाने के नाम पर ऐसा ऑफर दिया, जिसने स्वास्थ्य विभाग को सचेत कर दिया दरअसल अम्बुजा सिटी सेंटर के पास स्थित ITSA Hospital ने अपने स्वास्थ्य चेकअप पैकेज के साथ दुबई का फ्री टूर और दो करोड़ रुपये जीतने का लकी ड्रॉ ऑफर प्रचारित किया। विज्ञापन में साफ कहा गया था कि हेल्थ चेकअप कराने पर लकी ड्रॉ में बड़ी रकम या विदेश यात्रा का मौका मिल सकता है। इस ऑफर के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इसे पूरी तरह भ्रामक, अनैतिक और कानून का उल्लंघन माना क्योंकि यह इलाज को लॉटरी से जोड़ने जैसा था और स्पष्ट रूप से प्रलोभन था।

ITSA HOSPITAL का लुभावना ऑफर

लुभावने ऑफर ने मचाया विवाद, CMHO ने दिया नोटिस

अस्पताल के विज्ञापन में हेल्थ चेकअप को एक तरह की ‘लॉटरी’ बना दिया गया था। मरीजों को यह संदेश दिया जा रहा था कि जांच करवाने से न सिर्फ स्वास्थ्य लाभ मिलेगा बल्कि दुबई घूमने या करोड़ों जीतने का मौका भी मिल सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह तरीका मरीजों में गलत धारणा पैदा करता है और चिकित्सा पेशे की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।

CMHO का नोटिस

इसके बाद रायपुर जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने मामले को गंभीरता से लिया। 14 जनवरी को अस्पताल संचालक को एक विस्तृत नोटिस जारी किया गया, जिसमें तुरंत विज्ञापन हटाने और ऐसी गतिविधियां बंद करने का आदेश दिया गया। नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई कि ऐसा न करने पर आगे की कानूनी कार्रवाई होगी। इस नोटिस की प्रतियां राज्य स्वास्थ्य सेवाओं के संचालक, जिला प्रशासन और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन को भी भेजी गईं।

उल्लंघन के मुख्य कानूनी प्रावधान

अस्पताल का यह विज्ञापन निम्नलिखित नियमों का खुला उल्लंघन था, नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) रेगुलेशन 6.1.1 के अनुसार किसी भी चिकित्सकीय सेवा या जांच को इनाम, लॉटरी या अप्रत्यक्ष लाभ से जोड़कर प्रचारित करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) एक्ट, 1954 की धारा 3 और 4 के अनुसार भी स्वास्थ्य संबंधी झूठे, भ्रामक या प्रलोभन वाले दावों पर सख्त रोक लगाता है। जबकि नर्सिंग होम एक्ट में लिखा गया है की ऐसी गतिविधियां जो मरीजों में भ्रम पैदा करें, प्रतिबंधित हैं।

छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल के सदस्यों की राय

छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल के सदस्य डॉ. राकेश गुप्ता ने द लेंस से कहा “किसी भी मरीज को इलाज या जांच के लिए लुभाने वाला विज्ञापन मेडिकल एथिक्स और नर्सिंग होम एक्ट का स्पष्ट उल्लंघन है। विज्ञापनों के माध्यम से एक खराब परिपाटी की शुरुआत को रोकने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी और संचालक स्वास्थ्य सेवाओं की तरफ से किया गया है इसका पालन करना मेडिकल बिरादरी की जिम्मेदारी है। “

डॉ. राकेश गुप्ता,छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल सदस्य

ऑफर वापस लिया

नोटिस मिलने के 2 दिन बाद इट्सा हॉस्पिटल्स ने ऑफर वापस ले लिया। 16 जनवरी में प्रकाशित विज्ञापन में अस्पताल ने स्पष्ट लिखा कि “पूर्व में प्रकाशित ऑफर अब विधिवत वापस (withdraw) कर दिया गया है और वर्तमान में अमान्य है।”

ऑफर वापस लेकिन खेद प्रकट नहीं
डॉ. ललित शाह,छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल सदस्य

इस पर छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल के सदस्य डॉ. ललित शाह ने अपनी राय रखते हुए द लेंस से कहा

“ऐसे भ्रामक और प्रलोभन वाले विज्ञापन पहले से ही नहीं जारी करने चाहिए थे। अगर अनजाने में गलती हो भी गई तो सिर्फ ऑफर वापस लेना काफी नहीं है, अस्पताल को सार्वजनिक रूप से खेद भी प्रकट करना चाहिए था।”

हरियाणा का पुराना मामला, समान उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई

यह कोई नया मामला नहीं है। वर्ष 2022 में हरियाणा के गुरुग्राम में मदालसा हॉस्पिटल ने फ्री OPD और ट्रीटमेंट का प्रचार सोशल मीडिया पर किया था। इसमें डॉक्टरों की तस्वीरें और नामों का इस्तेमाल किया गया था। हरियाणा मेडिकल काउंसिल ने 7 डॉक्टरों को सख्त चेतावनी जारी की और 15 दिनों के अंदर नोटरीकृत एफिडेविट जमा करने का आदेश दिया, जिसमें भविष्य में ऐसा अनैतिक प्रचार न करने का वादा शामिल था। दोबारा उल्लंघन पर रजिस्ट्रेशन सस्पेंड करने की चेतावनी भी दी गई थी।

मदालसा हॉस्पिटल का प्रचार
हरियाणा मामला पर उल्लंघन पर कार्रवाई

गौरतलब है कि ऐसे अनैतिक विज्ञापनों पर कार्रवाई का मुख्य अधिकार राज्य मेडिकल काउंसिल के पास होता है जो NMC के दिशा-निर्देशों के तहत काम करती है। CMHO जैसे स्थानीय अधिकारी तुरंत नोटिस जारी कर सकते हैं। उल्लंघन साबित होने पर जुर्माना, अस्पताल लाइसेंस का निलंबन या रद्द करना ,डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन सस्पेंड या रद्द या ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज एक्ट के तहत पुलिस केस दर्ज किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि स्वास्थ्य सेवा कोई व्यापार नहीं, बल्कि सेवा है। ऐसे प्रलोभन वाले विज्ञापन मरीजों का भरोसा तोड़ते हैं और पूरे चिकित्सा पेशे की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाते हैं।



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