Amartya Sen SIR NOTICE: 7 जनवरी 2026पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन को चुनाव आयोग ने SIR के तहत सुनवाई के लिए नोटिस भेजा है। अभिषेक ने इसे ‘बेहद दुखद’ बताते हुए कहा कि इसके पीछे राजनीतिक मंशा है और BJP-चुनाव आयोग की साठगांठ से बंगाल के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है
अभिषेक बनर्जी ने 6 जनवरी को बिरभूम जिले के रामपुरहाट में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा, ‘देश का गौरव बढ़ाने वाले अमर्त्य सेन को SIR सुनवाई के लिए नोटिस भेजा गया। यह बहुत दुखद है। दुनिया उन्हें सम्मान देती है, लेकिन यहां उन्हें परेशान किया जा रहा है।’ उन्होंने दावा किया कि क्रिकेटर मोहम्मद शमी और TMC सांसद-अभिनेता देव (दीपक अधिकारी) को भी ऐसे नोटिस मिले हैं। अभिषेक ने इसे बंगाल की जानी-मानी हस्तियों को बदनाम करने और परेशान करने की कोशिश बताया।
हालांकि, मिली जानकारी के अनुसार चुनाव आयोग ने अमर्त्य सेन को भेजा गया नोटिस किसी जांच या गंभीर मामले की वजह से नहीं है। यह सिर्फ उनके नाम की स्पेलिंग में कंप्यूटर सिस्टम की तकनीकी गलती के कारण ऑटोमैटिक जेनरेट हुआ था। मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार 92 साल के अमर्त्य सेन को व्यक्तिगत रूप से सुनवाई के लिए आने की कोई जरूरत नहीं है। बूथ लेवल अधिकारी (BLO) खुद इस गलती को ठीक कर देंगे। आयोग ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों (85 साल से ऊपर) के लिए घर पर ही verification की सुविधा है।
आयोग से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि जैसे ही इस त्रुटि की जानकारी मिली, इसे जल्द सुधारने का निर्देश दे दिया गया। अभी तक आयोग की ओर से कोई औपचारिक सार्वजनिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों ने इसे पूरी तरह तकनीकी मामला बताया। अमर्त्य सेन के परिवार के एक सदस्य ने भी कहा कि उन्हें अभी कोई नोटिस नहीं मिला है। सेन का पैतृक घर बिरभूम के बोलपुर-शांतिनिकेतन में है और वे वहां के मतदाता हैं, हालांकि लंबे समय से अमेरिका में रहते हैं।
TMC ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है। अभिषेक बनर्जी ने रैली में कहा कि SIR के नाम पर बंगाल के लोगों को परेशान किया जा रहा है और यह BJP की साजिश है। पार्टी पहले से ही SIR प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है और सुप्रीम कोर्ट भी जा चुकी है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में SIR का दूसरा चरण चल रहा है, जिसमें लाखों मतदाताओं की सुनवाई हो रही है। कई जगहों पर नाम हटाने या गड़बड़ी के आरोप लग रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।

