शाहरुख को घेरने वाले बीसीसीआई से क्यों नहीं पूछते

NFA@0298
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हमारी सामूहिक चेतना को किस तरह कुंद किया जा रहा है, उसका एक उदाहरण शाहरुख खान पर भाजपा और हिंदू संगठनों की ओर से उन पर किए जा रहे हमलों में देखा जा सकता है।

अपनी आईपीएल टीम कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के लिए शाहरुख खान ने खुली नीलामी में बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को खरीदा है, जिससे नाराज होकर ज्ञानपीठ से सम्मानित रामभद्राचार्य से लेकर कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर और उत्तर प्रदेश से भाजपा के पूर्व विधायक संगीत सोम तक उन्हें ‘देशद्रोही’ और ‘गद्दार’ बता रहे हैं! उनसे माफी की मांग कर रहे हैं। उनकी नाराजगी बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर होने वाली ज्यादतियों और हाल ही में कुछ हिंदुओं की हत्या से जुडी हुई है।

बांग्लादेश में जो कुछ हो रहा है, उसे जायज नहीं ठहराया जा सकता। लेकिन इससे जुड़ी भारत की चिंता से बांग्लादेश को अवगत कराने की जिम्मेदारी सरकार की है, इसके लिए शाहरुख को क्यों घेरा जा रहा है?

शाहरुख पर किए जा रहे हमले शर्मनाक हैं और भारतीय जनता पार्टी तथा उससे जुड़े हिंदू संगठनों के दोहरे रुख को उजागर करते हैं।

क्या यह बताने की जरूरत है कि आईपीएल की नीलामी बीसीसीआई आईसीसी की निगरानी में होती है, जिसके सर्वेसर्वा देश के गृहमंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह हैं।

क्या रामभद्राचार्य, संगीत सोम और कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर वगरैह जय शाह के खिलाफ भी ऐसी बयानबाजी करेंगे कि आखिर उन्होंने बांग्लादेश के खिलाड़ियों को आईपीएल की नीलामी में शामिल क्यों होने दिया?

विश्व कप क्रिकेट में बीसीसीआई की सहमति से ही भारत और पाकिस्तान के मैच हो सके थे, क्या यह भी बताने की जरूरत है।

बांग्लादेश ही नहीं, भारत सही किसी भी देश में जातीय या नस्लीय आधार पर होने वाले हमले किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हैं। इसके साथ ही यह भी अस्वीकार्य है कि इनकी आड़ में देश की समरसता को बिगाड़ा जाए।

शाहरुख पर हमले करने वालों के राजनीतिक निहितार्थ स्पष्ट हैं। दरअसल ये लोग अपनी खुद की मोदी सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं और उसकी विदेश नीति में रोड़े अटका रहे हैं।

क्या यह बताने की जरूरत है कि भयंकर अराजकता और अस्थिरता की ओर बढ़ रहे बांग्लादेश की अशांति भारत के हित में नहीं है। बीसीसीआई और सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वे ऐसे गैरजिम्मेदाराना लोगों पर अंकुश लगाएं।

पाकिस्तान के खिलाड़ियों की आईपीएल में नीलामी पर रोक है, और यह फैसला तो सरकार और बीसीसीआई ने ही लिया था। बांग्लादेश के खिलाड़ियों के बारे में भी वही फैसला ले सकते हैं, ऐसे में अकेले शाहरुख पर हमले का क्या मतलब है?

यह नहीं हो सकता कि बीसीसीआई कमाई के लिए आईपीएल को बढ़ावा दे, प्रायोजकों के हितों को साधने के लिए विश्व कप में पाकिस्तान से मैच की इजाजत दे और आईपीएल खेलने आ रहे विदेशी खिलाड़ी की नीलामी के विरोध पर चुप्पी साध ले।

शाहरुख को घेरने वाले बीसीसीआई से क्यों नहीं पूछते

हमारी सामूहिक चेतना को किस तरह कुंद किया जा रहा है, उसका एक उदाहरण शाहरुख खान पर भाजपा और हिंदू संगठनों की ओर से उन पर किए जा रहे हमलों में देखा जा सकता है।

अपनी आईपीएल टीम कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के लिए शाहरुख खान ने खुली नीलामी में बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को खरीदा है, जिससे नाराज होकर ज्ञानपीठ से सम्मानित रामभद्राचार्य से लेकर कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर और उत्तर प्रदेश से भाजपा के पूर्व विधायक संगीत सोम तक उन्हें ‘देशद्रोही’ और ‘गद्दार’ बता रहे हैं! उनसे माफी की मांग कर रहे हैं। उनकी नाराजगी बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर होने वाली ज्यादतियों और हाल ही में कुछ हिंदुओं की हत्या से जुडी हुई है।

बांग्लादेश में जो कुछ हो रहा है, उसे जायज नहीं ठहराया जा सकता। लेकिन इससे जुड़ी भारत की चिंता से बांग्लादेश को अवगत कराने की जिम्मेदारी सरकार की है, इसके लिए शाहरुख को क्यों घेरा जा रहा है?

शाहरुख पर किए जा रहे हमले शर्मनाक हैं और भारतीय जनता पार्टी तथा उससे जुड़े हिंदू संगठनों के दोहरे रुख को उजागर करते हैं।

क्या यह बताने की जरूरत है कि आईपीएल की नीलामी बीसीसीआई आईसीसी की निगरानी में होती है, जिसके सर्वेसर्वा देश के गृहमंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह हैं।

क्या रामभद्राचार्य, संगीत सोम और कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर वगरैह जय शाह के खिलाफ भी ऐसी बयानबाजी करेंगे कि आखिर उन्होंने बांग्लादेश के खिलाड़ियों को आईपीएल की नीलामी में शामिल क्यों होने दिया?

विश्व कप क्रिकेट में बीसीसीआई की सहमति से ही भारत और पाकिस्तान के मैच हो सके थे, क्या यह भी बताने की जरूरत है।

बांग्लादेश ही नहीं, भारत सही किसी भी देश में जातीय या नस्लीय आधार पर होने वाले हमले किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हैं। इसके साथ ही यह भी अस्वीकार्य है कि इनकी आड़ में देश की समरसता को बिगाड़ा जाए।

शाहरुख पर हमले करने वालों के राजनीतिक निहितार्थ स्पष्ट हैं। दरअसल ये लोग अपनी खुद की मोदी सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं और उसकी विदेश नीति में रोड़े अटका रहे हैं।

क्या यह बताने की जरूरत है कि भयंकर अराजकता और अस्थिरता की ओर बढ़ रहे बांग्लादेश की अशांति भारत के हित में नहीं है। बीसीसीआई और सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वे ऐसे गैरजिम्मेदाराना लोगों पर अंकुश लगाएं।

पाकिस्तान के खिलाड़ियों की आईपीएल में नीलामी पर रोक है, और यह फैसला तो सरकार और बीसीसीआई ने ही लिया था। बांग्लादेश के खिलाड़ियों के बारे में भी वही फैसला ले सकते हैं, ऐसे में अकेले शाहरुख पर हमले का क्या मतलब है?

यह नहीं हो सकता कि बीसीसीआई कमाई के लिए आईपीएल को बढ़ावा दे, प्रायोजकों के हितों को साधने के लिए विश्व कप में पाकिस्तान से मैच की इजाजत दे और आईपीएल खेलने आ रहे विदेशी खिलाड़ी की नीलामी के विरोध पर चुप्पी साध ले।



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