नेशनल ब्यूरो। नई दिल्ली
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रेमन डेका ने अपने एक आदेश में प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में कुलसचिव उप कुल सचिव की नियुक्ति, प्रतिनियुक्ति, पदस्थापना और विश्वविद्यालयों के शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ जांच और जांच के बाद की गई कार्रवाई की पूर्व सूचना कुलाधिपति यानि राज्यपाल को देने के आदेश दिए हैं।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में विश्विद्यालयों में नियुक्ति प्रतिनियुक्ति और किसी को हटाए जाने का आदेश कार्यकारी परिषद के अधीन होता रहा हैं।
भारत में राज्य विश्वविद्यालयों में कुलाधिपति की भूमिका महत्वपूर्ण है, जहां राज्यपाल सामान्यतः पदेन कुलाधिपति होते हैं। छत्तीसगढ़ जैसा आदेश पूर्व के तमिलनाडु के राज्यपाल द्वारा भी दिया गया था जिसकी डीएमके सरकार ने जमकर आलोचना किम तमिलनाडु का यह बवाल न्यायालय तक पहुंचा।
क्या है अलग अलग राज्यों में नियम
कुलाधिपति विश्वविद्यालय के प्रमुख के रूप में कार्य करते हैं और कुलपति की नियुक्ति में मुख्य भूमिका निभाते हैं, जो आगे अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति को प्रभावित करती है। यूजीसी दिशानिर्देश मुख्य रूप से शिक्षकों की नियुक्ति पर केंद्रित हैं, लेकिन प्रशासनिक पदों जैसे कुलसचिव (रजिस्ट्रार) के लिए राज्य-विशिष्ट अधिनियम लागू होते हैं।
केंद्रीय विश्वविद्यालयों में, सेंट्रल यूनिवर्सिटी एक्ट 2009 के अनुसार, कुलाधिपति की नियुक्ति विजिटर (राष्ट्रपति) द्वारा होती है। कुलसचिव की नियुक्ति कार्यकारी परिषद द्वारा चयन समिति की सिफारिश पर होती है, लेकिन प्रथम कुलसचिव विजिटर द्वारा नियुक्त होता है। कुलाधिपति का सीधा हस्तक्षेप सीमित है, लेकिन विवादों में विजिटर के माध्यम से अंतिम निर्णय होता है। यानि कुलाधिपति का हस्तक्षेप सीमित है।
उत्तर प्रदेश में, यूपी स्टेट यूनिवर्सिटी एक्ट 1973 के तहत कुलसचिव एक वेतनभोगी अधिकारी है, जिसकी नियुक्ति सीधे कुलाधिपति द्वारा की जाती है। अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति में कुलाधिपति की अनुमोदन भूमिका प्रमुख है। बिहार में, बिहार यूनिवर्सिटी एक्ट 1976 के अनुसार, कुलसचिव की नियुक्ति कुलाधिपति द्वारा पैनल से की जाती है, और वे विश्वविद्यालय के अन्य पदों पर निरीक्षण शक्ति रखते हैं।
महाराष्ट्र में, महाराष्ट्र पब्लिक यूनिवर्सिटी एक्ट 2016 के अंतर्गत कुलसचिव की नियुक्ति कुलपति द्वारा चयन समिति की सिफारिश पर होती है। कुलाधिपति (राज्यपाल) कुलपति की नियुक्ति करते हैं, जिससे अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है, लेकिन सीधी भूमिका नहीं।
तमिलनाडु में, विश्वविद्यालय अधिनियमों में कुलाधिपति (राज्यपाल) कुलपति की नियुक्ति करते हैं, लेकिन राज्य सरकार द्वारा हाल के संशोधनों से शक्ति हस्तांतरण का प्रयास हो रहा है, जो केंद्र-राज्य विवाद का कारण है। यहां पर कुलसचिव की नियुक्ति सिंडिकेट द्वारा होती है, लेकिन कुलाधिपति का अनुमोदन आवश्यक हो सकता है।इन भिन्नताओं से स्पष्ट है कि कुलाधिपति की भूमिका राज्य अधिनियमों पर निर्भर है।
पूर्व आईएएस और प्रशासनिक मामलों के जानकार सुशील त्रिवेदी कहते हैं कि राज्य सरकार द्वारा पारित सारे आदेश अनिवार्य रूप से राज्यपाल के पास जाते हैं। ऐसे में अगर विश्वविद्यालयों में नियुक्ति और जांच के आदेश अगर राज्यपाल को सूचनार्थ प्रेषित किए जाते हैं तो उसमें कोई बुराई नही हैं। पूर्व कैबिनेट मिनिस्टर और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सत्यनारायण शर्मा कहते हैं कि छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा पारित आदेश के तहत विश्विद्यालयों में नियुक्ति और जांच कुलपति एवं कार्य परिषद के माध्यम से की जाती है अगर ऐसा कोई आदेश राज्यपाल के कार्यालय से आया है तो वह विधानसभा की अवमानना है।

