सवाल पूछने पर भड़के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने आखिरकार मांगी माफी

NFA@0298
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लेंस डेस्‍क। इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल के कारण कई लोगों की मौत और बीमारियों के बाद राजनीतिक विवाद काफी तेज हो गया है। मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से जब एक पत्रकार ने इस मुद्दे पर सवाल किया तो वे भड़क गए और कैमरे के सामने असभ्य भाषा का इस्तेमाल कर दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद चारों तरफ आलोचना शुरू हो गई। अब खुद कैलाश विजयवर्गीय ने इस घटना पर माफी मांग ली है।

मंत्री ने अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट डालकर खेद जताया है। उन्होंने लिखा कि लगातार दो दिनों से बिना रुके हालात संभालने में जुटे होने और अपनों को खोने के दुख के कारण उनके मुंह से गलत शब्द निकल गए, जिस पर उन्हें अफसोस है।

घटना उस समय हुई जब NDTV के पत्रकार अनुराग द्वारी ने मंत्री से पूछा कि दूषित पानी से हो रही मौतों के लिए प्रशासन की क्या जिम्मेदारी है और मरीजों को निजी अस्पतालों के बिल का रिफंड कब मिलेगा। साथ ही इलाके में साफ पीने के पानी की उचित व्यवस्था न होने का सवाल भी उठा। इन सवालों पर विजयवर्गीय ने गुस्से में आकर कहा कि बेकार के सवाल न पूछें और आपत्तिजनक शब्‍दों का इस्‍तेमाल किया।

वर्तमान में भागीरथपुरा के हालात अभी भी गंभीर बने हुए हैं। नगर निगम मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने आधिकारिक तौर पर 7 मौतों की पुष्टि की है, लेकिन कुछ अन्य सूत्रों के अनुसार यह संख्या 13 तक पहुंच चुकी है। 149 से ज्यादा लोग अभी विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद अस्पताल पहुंचे, मरीजों से मिले और मुफ्त इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मेयर ने स्वीकार किया कि ड्रेनेज लाइन से लीकेज के चलते गंदा पानी पीने की पाइपलाइन में मिल गया, जिससे डायरिया और उल्टी जैसी बीमारियां तेजी से फैलीं।

विपक्षी कांग्रेस ने इस पूरे मामले में सरकार पर जोरदार हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि सत्ताधारी भाजपा नेताओं का घमंड चरम पर है। जहरीले पानी से लोगों की जान जा रही है और जिम्मेदारी तय करने की बजाय मंत्री गाली-गलौज करने लगते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि ऐसे असभ्य व्यवहार करने वाले मंत्री से तत्काल इस्तीफा लिया जाए।

भागीरथपुरा मंत्री विजयवर्गीय के अपने विधानसभा क्षेत्र इंदौर-1 में आता है। देश के सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर में यह घटना बेहद गंभीर मानी जा रही है।





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