डीआरडीओ जल्दी ही बना लेगा स्वदेशी ‘सुदर्शन चक्र’: राजनाथ सिंह

NFA@0298
4 Min Read



नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को कहा कि डीआरडीओ अगले दशक में देश की हवाई सुरक्षा मजबूत करने के लिए हमारे जरूरी ठिकानों को एयर डिफेंस सिस्टम से लैस करने के लिए तैयार है। हमने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हवाई युद्ध में एयर डिफेंस की अहमियत देखी। मुझे भरोसा है कि डीआरडीओ जल्द ही इस लक्ष्य को पाने के लिए पूरे दिल से काम करेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि डीआरडीओ जल्द ही रूस के एयर डिफेंस सिस्टम एस-400 की तर्ज पर स्वदेशी ‘सुदर्शन चक्र’ बना लेगा।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के 68वें स्थापना दिवस के मौके पर नई दिल्ली में डीआरडीओ मुख्यालय का दौरा करने के दौरान रक्षा मंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों और वैज्ञानिकों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि डीआरडीओ की हथियार प्रणालियों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अहम भूमिका निभाई, जो राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए संगठन की व्यावसायिकता और प्रतिबद्धता का सबूत है। सशस्त्र बलों को आधुनिक हथियारों से लैस करके भारत की स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए डीआरडीओ की तारीफ करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि आॅपरेशन के दौरान हथियारों ने बिना किसी रुकावट के काम किया, जिससे सैनिकों का हौसला बढ़ा।

रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से अपने भाषण में स्वदेशी सुदर्शन चक्र बनाने की घोषणा की थी, जिसमें डीआरडीओ अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि इस पहल के तहत डीआरडीओ अगले दशक में हवाई सुरक्षा पक्का करने के लिए हमारे जरूरी ठिकानों को एयर डिफेंस सिस्टम से लैस करने के लिए तैयार है। हमने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के साथ हवाई संघर्ष के दौरान एयर डिफेंस की अहमियत देखी। मुझे भरोसा है कि डीआरडीओ जल्द ही इस लक्ष्य को पाने के लिए पूरे दिल से काम करेगा।

राजनाथ सिंह ने प्राइवेट सेक्टर के साथ डीआरडीओ के सहयोग को मानते हुए कहा कि रक्षा उद्योग और स्टार्टअप्स के साथ बढ़ते जुड़ाव से एक तालमेल वाला रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र बना है। उन्होंने कहा कि डीआरडीओ ने लगातार अपने काम करने के तरीकों में सुधार किया है। खरीद से लेकर परियोजना प्रबंधन तक, उद्योग जुड़ाव से लेकर स्टार्ट अप और लघु उद्योगों के साथ मिलकर काम करने तक, काम को आसान, तेज और ज्यादा भरोसेमंद बनाने की कोशिश दिख रही है। रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ से कहा कि वह तेजी से बदलते तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र के साथ तालमेल बिठाते हुए आगे बढ़ता रहे और बदलते समय के हिसाब से उत्पाद लाता रहे।

उन्होंने डीप टेक और नेक्स्ट-जेनरेशन टेक्नोलॉजी की दिशा में डीआरडीओ की कोशिशों की तारीफ करते हुए कहा कि इस कोशिश में तरक्की से न सिर्फ़ देश की काबिलियत बढ़ेगी, बल्कि डिफेंस इकोसिस्टम भी मजबूत होगा। राजनाथ सिंह ने कहा कि आज का जमाना सिर्फ साइंस का नहीं है, बल्कि लगातार डेवलपमेंट और लगातार सीखने का है। इस बदलती दुनिया में टेक्नोलॉजी स्कैनिंग, काबिलियत का अंदाजा और भविष्य की तैयारी अब सिर्फ शब्द नहीं रह गए हैं। 

उन्होंने कहा कि दुनिया हर दिन बदल रही है। टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और नए युद्ध के तरीके तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जिससे कल का ज्ञान बेकार हो रहा है। हमें कभी यह नहीं मान लेना चाहिए कि सीखने का प्रोसेस खत्म हो गया है। हमें सीखते रहना चाहिए और खुद को चैलेंज करते रहना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी के लिए रास्ता बन सके।



Source link

Share This Article
Leave a Comment