- साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल की राख मुक्तिबोध की स्मृति में बनाए गए त्रिवेणी परिसर में बिखेरी गई
रायपुर। ज्ञानपीठ से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल की राख 30 दिसंबर को उनके गृह नगर राजनांदगांव में स्थित महाकवि गजानन माधव मुक्तिबोध की स्मृति में बनाए गए त्रिवेणी परिसर के आसपास बिखेर दी गईं।
विनोद कुमार शुक्ल का 23 दिसंबर को रायपुर स्थित एम्स में सांस की बीमारी की वजह से निधन हो गया था। उनका जन्म एक जनवरी, 1937 को राजनांदगांव में हुआ था। 1960 के दशक में उनकी मुलाकात राजनांदगांव में ही मुक्तिबोध से हुई थी, जहां वे दिग्विजय कॉलेज में हिंदी के प्राध्यापक नियुक्त किए गए थे। मुक्तिबोध ने सबसे पहले विनोद जी कविताओं की पहचान की थी।
विनोद कुमार शुक्ल की स्कूली शिक्षा राजनांदगांव के स्टेट हाई स्कूल में हुई थी। उनके पुत्र शाश्वत और अन्य परिजनों ने विनोद जी की अस्थियों की कुछ राख मुक्तिबोध के साथ ही पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी और बलदेव प्रसाद मिश्र की याद में बनाए गए त्रिवेणी परिसर में बिखेर दी। उल्लेखनीय है कि रानीसागर और बूढ़ासागर के बीच स्थित दिग्विजय कॉलेज के परिसर में ही मुक्तिबोध रहते थे।
इसके अलावा विनोद जी की राख स्टेट हाई स्कूल और राजनांदगांव से नजदीक स्थित मोहरा में शिवनाथ नदी के करीब जहां उनके पूर्वजों के दाह संस्कार हुए हैं, वहां-वहां की मिट्टी में भी बिखेरी गई।

