
US Iran Conflict: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान को लेकर बदलता रुख वैश्विक राजनीति में अनिश्चितता का बड़ा कारण बन गया है। ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को “48 घंटे” की नई चेतावनी देते हुए पूरी तबाही मचाने की धमकी दी है, जबकि इससे पहले भी वे कई बार इसी तरह की डेडलाइन दे चुके हैं और फिर खुद ही उन्हें टालते रहे हैं।
होर्मुज स्ट्रेट, जो वैश्विक तेल सप्लाई की जीवनरेखा माना जाता है, उसे लेकर ट्रंप के विरोधाभासी बयान अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता पैदा कर रहे हैं। कभी वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने की बात करते हैं, तो कभी सीधे सत्ता परिवर्तन की मांग पर उतर आते हैं, जिससे उनकी रणनीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

1 मार्च से लेकर अब तक ट्रंप कई बार अलग-अलग तारीखों और चेतावनियों के साथ सामने आए—कभी 20 गुना ज्यादा नुकसान पहुंचाने की धमकी, कभी 48 घंटे में कार्रवाई की बात, तो कभी हमले को 5 दिन और फिर 10 दिन के लिए टालने का फैसला। हाल ही में उन्होंने कहा कि अमेरिका को होर्मुज स्ट्रेट की जरूरत ही नहीं है, लेकिन साथ ही यह भी संकेत दिया कि ईरान के खिलाफ जंग खत्म होने पर यह रास्ता खुद ही खुल जाएगा। इन बयानों ने यह साफ कर दिया है कि ट्रंप की नीति स्पष्ट कम और दबाव बनाने वाली ज्यादा नजर आ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बार-बार बदलती रणनीति और सार्वजनिक धमकियों से अमेरिका की वैश्विक साख को नुकसान पहुंच रहा है। एक तरफ ट्रंप ईरानी जनता से बगावत की अपील करते हैं, तो दूसरी ओर ईरान को पूरी तरह तबाह करने की चेतावनी देते हैं, जिससे उनके संदेश में स्पष्टता की कमी दिखाई देती है।
फिलहाल दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह सिर्फ बयानबाजी है या आने वाले दिनों में वास्तव में कोई बड़ा सैन्य कदम उठाया जाएगा। लगातार बदलती डेडलाइन और आक्रामक बयानबाजी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सतर्क कर दिया है और मिडिल ईस्ट में हालात और ज्यादा तनावपूर्ण होते जा रहे हैं।



