26 माओवादी मुख्यधारा में लौटे

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डॉ सैयद फारूख अली, सुकमा। CG Breaking : दक्षिण बस्तर के अति नक्सल प्रभावित जिला सुकमा में माओवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को आज एक और बड़ी सफलता मिली है। पुलिस द्वारा संचालित “पूना मार्गेमः पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल से प्रभावित होकर 07 महिलाओं सहित कुल 26 सक्रिय माओवादी कैडरों ने रक्षित आरक्षी केंद्र सुकमा में वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया।

आत्मसमर्पित माओवादी लंबे समय से PLGA बटालियन, दक्षिण बस्तर डिवीजन, माड़ डिवीजन तथा सीमावर्ती ओड़िशा (AOB/AOB – Andhra–Odisha Border) क्षेत्र में सक्रिय रहे थे। इनमें कुख्यात रैंक के कैडर शामिल हैं, जिन पर कुल मिलाकर 64 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण के अनुसार आत्मसमर्पण करने वालों में CYPCM रैंक के 01, DVCM रैंक के 01, PPCM रैंक के 03, ACM रैंक के 03 और

18 पार्टी मेंबर शामिल हैं।

यह सभी माओवादी कई बड़ी और गंभीर घटनाओं में लिप्त रहे हैं। इनमें वर्ष 2017 में सोनाबेड़ा–कोरापुट मार्ग पर हुए IED विस्फोट में 14 जवानों की शहादत तथा वर्ष 2020 में मिनपा मुठभेड़ में 17 जवानों के शहीद होने जैसी बड़ी वारदातें प्रमुख हैं।

अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ शासन की “छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण पुनर्वास नीति-2025’’ के प्रभावी क्रियान्वयन के चलते माओवादी लगातार हिंसा का रास्ता छोड़ रहे हैं। अंदरूनी इलाकों में नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना, सघन सर्च ऑपरेशन और खुफिया नेटवर्क की मजबूती से संगठन का प्रभाव तेजी से घटा है।

इस ऐतिहासिक आत्मसमर्पण के दौरान डीआरजी सुकमा, इंटेरोगेशन शाखा, जिला विशेष आसूचना शाखा (विआशा.), आरएफटी सुकमा, सीआरपीएफ की कोबरा 201 बटालियन तथा सीआरपीएफ की 02, 159, 212, 217, 226 वाहिनियों की आसूचना शाखा की विशेष भूमिका रही।

पुनर्वास की गारंटी

उपस्थित अधिकारियों ने सभी आत्मसमर्पित माओवादियों को शासन की नीति के तहत प्रत्येक को 50-50 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि, घोषित इनाम राशि तथा रोजगार, आवास, शिक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने का आश्वासन दिया।

पुलिस प्रशासन ने शेष माओवादियों से भी अपील की है कि उनके पास अब केवल एक ही विकल्प बचा है—हिंसा छोड़कर शांति और विकास का मार्ग अपनाएं और “पूना मार्गेमः पुनर्वास से पुनर्जीवन’’ अभियान में शामिल होकर नया जीवन प्रारंभ करें।

वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में सुकमा पुलिस द्वारा नक्सल मुक्त बस्तर के संकल्प को साकार करने हेतु लगातार नक्सल विरोधी अभियान संचालित किया जा रहा है। आज का आत्मसमर्पण इसी दिशा में माओवादी नेटवर्क के टूटने और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित होने का स्पष्ट संकेत है।



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