नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों की सूची जारी की। इस वर्ष कुल 131 व्यक्तियों को इन प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण योगदान देने वाले लोग शामिल हैं। इनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री पुरस्कार शामिल हैं। पुरस्कारों की यह सूची कला, सार्वजनिक मामलों, विज्ञान, चिकित्सा, खेलकूद, साहित्य और सामाजिक कार्य जैसे विविध क्षेत्रों से जुड़ी हस्तियों को कवर करती है।

इस वर्ष की सूची में 19 महिलाओं, 6 विदेशी या भारतीय मूल के व्यक्तियों और 16 मरणोपरांत सम्मान शामिल हैं। पद्म विभूषण की श्रेणी में दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र (मरणोपरांत, कला क्षेत्र, महाराष्ट्र) और पूर्व केरल मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन (मरणोपरांत, सार्वजनिक मामलों, केरल) जैसे नाम प्रमुख हैं। अन्य पद्म विभूषण प्राप्तकर्ता में केटी थॉमस (सार्वजनिक मामलों, केरल), एन राजम (कला, उत्तर प्रदेश) और पी नारायणन (साहित्य एवं शिक्षा, केरल) शामिल हैं। ये सम्मान उन व्यक्तियों को दिए गए हैं जिन्होंने राष्ट्र निर्माण में असाधारण भूमिका निभाई है।
पद्म भूषण श्रेणी में गायिका अलका याग्निक (कला, महाराष्ट्र), अभिनेता ममूटी (कला, केरल), पूर्व झारखंड मुख्यमंत्री शिबू सोरेन (मरणोपरांत, सार्वजनिक मामलों, झारखंड) और उद्योगपति उदय कोटक (व्यापार एवं उद्योग, महाराष्ट्र) जैसे नाम उल्लेखनीय हैं। अन्य प्राप्तकर्ताओं में भगत सिंह कोश्यारी (सार्वजनिक मामलों, उत्तराखंड), विजय अमृतराज (खेलकूद, संयुक्त राज्य अमेरिका) और डॉ. नोरी दत्तात्रेयुदु (चिकित्सा, संयुक्त राज्य अमेरिका) शामिल हैं। यह सूची दर्शाती है कि कैसे पुरस्कारों में राजनीति, कला और व्यवसाय के क्षेत्रों को संतुलित रूप से प्रतिनिधित्व दिया गया है।
पद्म श्री की सबसे बड़ी श्रेणी में 113 नाम हैं, जिसमें क्रिकेट कप्तान रोहित शर्मा (खेलकूद, महाराष्ट्र), महिला हॉकी गोलकीपर सविता पुनिया (खेलकूद, हरियाणा) और हरमनप्रीत कौर (खेलकूद, पंजाब) जैसे खेल जगत के सितारे शामिल हैं। इसके अलावा, अभिनेता प्रोसेनजीत चटर्जी (कला, पश्चिम बंगाल), सामाजिक कार्यकर्ता बुधरी ताती (सामाजिक कार्य, छत्तीसगढ़) और पुरातत्वविद् बुद्ध रश्मि मणि (पुरातत्व, उत्तर प्रदेश) जैसे नाम हैं।
इस श्रेणी में कई ग्रामीण और आदिवासी पृष्ठभूमि के लोग भी सम्मानित हुए हैं, जैसे 90 वर्षीय जनजातीय संगीतकार भिख्ल्या लडक्या ढिंडा (कला, महाराष्ट्र) और बस कंडक्टर अंके गौड़ा (सामाजिक कार्य, कर्नाटक)। इनमें से कई पुरस्कार मरणोपरांत दिए गए हैं, जो प्राप्तकर्ताओं के स्थायी योगदान को रेखांकित करते हैं।
बुधरी ताती के बारे में जानिए

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र में रहने वाली बुधरी ताती को स्थानीय लोग प्यार से ‘बड़ी दीदी’ कहकर बुलाते हैं। उन्होंने अपने जीवन के लगभग चार दशक समाज सेवा में समर्पित कर दिए हैं।
विशेष रूप से अबूझमाड़ जैसे चुनौतीपूर्ण और नक्सली प्रभाव वाले इलाकों में उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयास किए। वहां उन्होंने सिलाई प्रशिक्षण देकर सैकड़ों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है, साथ ही स्कूल से दूर रह गए बच्चों को पढ़ाई के प्रति जागरूक किया और शिक्षा की शुरुआत करवाई।
इसके अलावा, वृद्धाश्रम और अनाथ बच्चों की देखभाल में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। दंतेवाड़ा जिले के हीरानार की रहने वाली बुधरी ताती ने महिलाओं, बच्चियों और बुजुर्गों के उत्थान के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया। अब तक उन्होंने 500 से अधिक महिलाओं को स्वावलंबी बनाने में मदद की है।
उनके इस समर्पित कार्य के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने उन्हें सम्मानित भी किया है, और हाल ही में उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया है।

