
1 अप्रैल से पैन कार्ड से जुड़े कई अहम बदलाव लागू होने जा रहे हैं, जिनका असर पैन आवेदन प्रक्रिया और वित्तीय लेन-देन दोनों पर पड़ेगा। नए नियमों का उद्देश्य दस्तावेजी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और टैक्स अनुपालन को मजबूत करना है।
अब पैन कार्ड बनवाने के लिए केवल आधार कार्ड पर्याप्त नहीं होगा। आवेदकों को पहचान और जन्म तिथि के सत्यापन के लिए अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने होंगे। इनमें जन्म प्रमाण पत्र, वोटर आईडी, 10वीं का प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस या मजिस्ट्रेट द्वारा जारी हलफनामा शामिल हैं। साथ ही पैन पर दर्ज नाम का आधार कार्ड से पूरी तरह मेल खाना अनिवार्य होगा।
नए नियमों के तहत आवेदन फॉर्म भी बदले गए हैं। व्यक्तिगत आवेदकों के लिए अलग फॉर्म, कंपनियों, विदेशी नागरिकों और संस्थाओं के लिए अलग-अलग फॉर्म निर्धारित किए गए हैं, जिनका उपयोग 1 अप्रैल से अनिवार्य होगा।
वित्तीय लेन-देन में भी पैन के उपयोग से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया है। अब एक वित्तीय वर्ष में 10 लाख रुपये से अधिक के कुल जमा या निकासी पर ही पैन देना अनिवार्य होगा, जबकि पहले एक दिन में 50 हजार रुपये से अधिक के लेन-देन पर पैन देना जरूरी था।
वाहन खरीद के मामले में भी बदलाव हुआ है। अब केवल 5 लाख रुपये से अधिक कीमत वाले वाहन की खरीद पर ही पैन आवश्यक होगा। वहीं बीमा पॉलिसी के लिए अब प्रीमियम की राशि चाहे कितनी भी हो, पैन देना अनिवार्य कर दिया गया है।
प्रॉपर्टी लेन-देन के लिए पैन की अनिवार्यता की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गई है। इसके अलावा होटल, रेस्टोरेंट या अन्य सेवाओं में नकद भुगतान की सीमा 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दी गई है, जिसके ऊपर पैन देना जरूरी होगा।



