दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय ध्वज वाले दो जहाज सुरक्षित निकल गए हैं। भारतीय एलपीजी टैंकर ‘शिवालिक’ के बाद दूसरा पोत ‘नंदा देवी’ भी इस संवेदनशील समुद्री मार्ग को सफलतापूर्वक पार कर खुले समुद्र में पहुंच गया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार ‘शिवालिक’ इस समय भारतीय नौसेना की निगरानी और सुरक्षा में आगे बढ़ रहा है। जहाज के अगले दो दिनों में भारत के किसी बंदरगाह, संभवतः मुंबई या कांडला पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब नरेंद्र मोदी और मसूद पेजेशकियन के बीच ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक मार्गों को सुचारु बनाए रखने को लेकर उच्चस्तरीय बातचीत हुई थी। माना जा रहा है कि इसी कूटनीतिक संवाद के बाद भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग देने का फैसला लिया गया। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने भी संकेत दिया था कि बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बावजूद भारतीय जहाजों को जल्द ही इस मार्ग से सुरक्षित गुजरने की अनुमति मिल सकती है। गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल और गैस निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए इस मार्ग पर किसी भी तरह का तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है।
इस बीच पोर्ट्स एंड शिपिंग मंत्रालय के अनुसार फारस की खाड़ी क्षेत्र में भारतीय ध्वज वाले कुल 28 जहाज संचालित हो रहे हैं। इनमें से 24 जहाज जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में हैं, जिन पर 677 भारतीय नाविक सवार हैं, जबकि चार जहाज पूर्वी हिस्से में हैं जिन पर 101 भारतीय नाविक मौजूद हैं। सभी जहाजों और चालक दल की सुरक्षा पर लगातार नजर रखी जा रही है।




