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नई दिल्ली। श्री राम जन्मभूमि (Ram Janmabhoomi) तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा संचालित अयोध्या के भव्य राम मंदिर में लाखों राम भक्तों द्वारा चढ़ाए गए चंदे और दान की राशि में भारी गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। ₹5 से ₹7.5 करोड़ तक की रकम गायब होने का दावा किया जा रहा है, जिसने पूरे देश में सनसनी फैला दी है। विपक्षी दलों ने इसे राम भक्तों के विश्वास के साथ धोखा बताया है, जबकि ट्रस्ट ने ऑडिट कराने की बात कही है।
राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व एकाउंटेंट महिपाल सिंह के खुलासे ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। महिपाल सिंह के अनुसार मंदिर के चढ़ावे में चोरी कई साल से हो रही है। महिपाल ने खुद चोरी पकड़ी थी। इसकी शिकायत श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भी की। इसके बाद महिपाल को ही वहां से हटा दिया गया था।
राम मंदिर में दान पेटियों में जमा होने वाले नोटों की गिनती, सोने-चांदी के आभूषणों और अन्य मूल्यवान चढ़ावों के रिकॉर्ड में बड़े अंतर की शिकायतें सामने आई हैं। सूत्रों के अनुसार, 2024 से अब तक की संग्रहित राशि और लेजर बैलेंस में भारी विसंगति पाई गई है। ट्रस्ट ने इसकी समीक्षा शुरू कर दी है और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारियों के द्वारा ऑडिट चल रहा है।
पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने दावा किया कि नोट गिनने के दौरान उन्होंने ₹5 लाख की चोरी पकड़ी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सोने, चांदी और आभूषणों का कोई सही रिकॉर्ड नहीं रखा गया, सीसीटीवी फुटेज डिलीट कर दिए गए और शिकायत करने पर उन्हें हटा दिया गया।
सिंह के अनुसार, यह गड़बड़ी लंबे समय से चल रही थी।
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सबसे तीखा हमला बोला। 7 जून को उन्होंने कहा कि राम मंदिर के दान में करोड़ों रुपये गायब हैं। यह राम भक्तों के प्रति विश्वासघात है। अखिलेश ने अदालत से स्वतः संज्ञान लेने और सीबीआई जांच की मांग की। उन्होंने पीएमओ द्वारा ट्रस्ट से रिपोर्ट मांगे जाने का भी जिक्र किया।
आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद संजय सिंह ने भी “चंदा चोरी” का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अन्य सदस्यों पर सवाल उठाए। आप ने पहले 2021 में भूमि घोटाले का भी आरोप लगाया था, जिसमें 2 करोड़ की जमीन को कुछ मिनटों में 18.5 करोड़ में ट्रस्ट को बेचने का दावा किया गया था। उस समय भी चंपत राय पर निशाना साधा गया था।
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी गांधी ने दान के दुरुपयोग को भक्तों के विश्वास का अपमान बताया। उन्होंने राम नाम पर हो रहे घोटालों पर सवाल उठाए।
महंत नृत्य गोपाल दास के शिष्य, महंत कमल नयन दास जैसे स्थानीय संतों ने भी गंभीर आशंका जताई। उन्होंने कहा कि अगर गड़बड़ी हुई है तो निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कुछ ने तो इतना कहा कि “सब चोर हैं, केवल भगवान ही जांच कर सकते हैं।”कमल नयन दास का कहना था कि मैने आंखों से देखा है जो साइकिल से चलते थे अब बड़ी बड़ी गाड़ियों से चलने लगे।
पूर्व भाजपा सांसद बृज भूषण शरण सिंह ने संकेत दिया कि बड़े लोगशामिल हैं, लेकिन नाम लेने से मना कर दिया। उन्होंने डर का हवाला दिया।
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अन्य अधिकारियों ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि ऑडिट चल रहा है और कोई बड़ी गड़बड़ी नहीं है। पुलिस और ट्रस्ट ने दावा किया कि एसबीआई के साथ खाते साफ हैं।
2021 में भी ट्रस्ट पर भूमि घोटाले के आरोप लगे थे। आप और सपा ने दावा किया था कि बाग बिजैसी गांव में एक जमीन 2 करोड़ में खरीदी गई और तुरंत 18.5 करोड़ में ट्रस्ट को बेच दी गई। गवाहों में अयोध्या मेयर ऋषिकेश उपाध्याय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा शामिल थे।
चंपत राय ने इसे बेबुनियाद बताया था।इसके अलावा, राम मंदिर निर्माण के नाम पर फर्जी वेबसाइट, क्यूआर कोड और रसीदों से लाखों रुपये ठगने के कई मामले सामने आए थे। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने खुद भक्तों को चेतावनी दी थी।
भाजपा ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने अखिलेश यादव के दावों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट पारदर्शी तरीके से काम कर रहा है और ऑडिट हो रहा है। दूसरी ओर, विपक्ष इसे भाजपा शासन में भ्रष्टाचार का प्रमाण बता रहा है।
अखिलेश यादव ने पूछा कि करोड़ों राम भक्तों का चंदा कहां गया? उन्होंने सीएजी रिपोर्ट और पूर्ण जांच की मांग की।ट्रस्ट ने 2024 से संग्रह की समीक्षा शुरू की है। पीएमओ ने भी विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है।
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