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नई दिल्ली । उच्चतम न्यायालय ने रानी कपूर और प्रिया कपूर के बीच सोना ग्रुप पारिवारिक ट्रस्ट को लेकर चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए पूर्व चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को मध्यस्थ नियुक्त किया है। जस्टिस जेबी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये आदेश दिया।
पिछली सुनवाई में उच्चतम न्यायालय ने इस विवाद को आपसी बातचीत के जरिए सुलझाने की सलाह दी थी। आज सभी पक्षों ने कोर्ट के इस सुझाव पर अपनी सहमति जाहिर की। इसी के मद्देनजर कोर्ट ने यह फैसला लिया है। उच्चतम न्यायालय ने सभी पक्षों को नसीहत दी कि वो इस विवाद को लेकर ना तो मीडिया में कोई बयान देगें और ना ही सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट करेंगे। उच्चतम न्यायालय मध्यस्थ की अंतरिम रिपोर्ट आने के बाद अगस्त में आगे इस पर सुनवाई करेगा।
कोर्ट ने 27 अप्रैल को कहा था कि विरासत की इस लंबी लड़ाई में 80 वर्षीया पक्षकार का कोई भला नहीं होने वाला है। कोर्ट ने कहा था कि मामले को लंबा खींचने से कुछ हासिल नहीं होता है वो भी बड़ी उम्र में।
दरअसल, दिवंगत बिजनेसमैन संजय कपूर की मां रानी कपूर ने पारिवारिक आरके फैमिली ट्रस्ट को भंग करने की मांग की है। रानी कपूर ने अपनी याचिका में कहा है कि आरके फैमिली ट्रस्ट के गठन और उसके प्रबंधन की परिस्थितियां सवालों के घेरे में हैं।
याचिका में कहा गया है कि आरके फैमिली ट्रस्ट का गठन बिना याचिकाकर्ता की जानकारी या सहमति के किया गया। इसी वजह से याचिकाकर्ता को ट्रस्ट से बाहर कर दिया गया। ट्रस्ट की सारी संपत्ति उनकी थीं, लेकिन ट्रस्ट का गठन करते समय उन्हें सूचना तक नहीं दी गई। ट्रस्ट के गठन के समय उन्हें हार्ट का स्ट्रोक आया था, जिसकी वजह से उनकी तबीयत खराब थी। रानी कपूर ने कहा है कि ट्रस्ट के कागजात पर हस्ताक्षर बिना उसका कंटेंट जाने करा लिया गया। कुछ सादे कागजों पर उनके हस्ताक्षर ले लिए गए।
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