
जयपुर। राजस्थान उच्च न्यायालय ने सीआरपीएफ कर्मचारियों का प्रशिक्षण भत्ता रोकने और बाद में उसकी रिकवरी करने के मामले में गृह मंत्रालय के सचिव, सीआरपीएफ के डीजी और डीओपीटी सचिव सहित संबंधित अकादमी के कमांडेंट से जवाब तलब किया है।
इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ताओं से की जा रही वसूली पर रोक लगा दी है। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने यह आदेश रितेन्द्र कुमार राठौड़ की ओर से दायर याचिका पर दिए।
याचिका में अधिवक्ता सुनील कुमार सिंगोदिया ने अदालत को बताया कि केंद्र के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने 5 सितंबर 2008 को आदेश जारी कर प्रावधान किया कि केंद्रीय कर्मचारी को यदि किसी अकादमी में पद स्थापित किया जाता है तो उसे बेसिक पे का तीस फीसदी तक प्रशिक्षण भत्ता दिया जाएगा।
याचिका में बताया गया कि याचिकाकर्ताओं को सीआरपीएफ ट्रेनिंग अकादमी में पदस्थापित किया गया और पदस्थापन के दौरान उनकी बेसिक पे का 24 फीसदी प्रशिक्षण भत्ता देना स्वीकृत किया। वहीं बाद में बिना किसी कारण और नोटिस के इस भत्ते को बंद कर दिया गया।
इसके बाद याचिकाकर्ताओं की ट्रेनिंग अकादमी से स्थानान्तरण हो गई। इसके बाद में उन्हें पूर्व में दिए गए प्रशिक्षण भत्ते की वसूली के आदेश जारी किए गए। जिसे चुनौती देते हुए कहा गया कि राज्य सरकार ने नियमानुसार ही उन्हें प्रशिक्षण भत्ता स्वीकृत कर जारी किया था।
इसलिए बाद में उसे बिना कारण रोकना और पूर्व में दिए प्रशिक्षण भत्ता की रिकवरी करना गलत है। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए रिकवरी पर रोक लगा दी है।

