साहब… यहां प्यास बुझाने के लिए चक्का जाम करना पड़ता है

NFA@0298
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अनूपपुर। ‘साहब! अर्जी लगाने से अगर प्यास बुझ जाती, तो आज हमें तपती सड़क पर खाली बाल्टियां लेकर नहीं बैठना पड़ता।’ ये लाइन मध्यप्रदेश के Anuppur जिले के ग्रामीणों क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की हैं। लगभग हर एक गांव की यही स्थिति है।Q

दरअसल 9 जून की सुबह अनूपपुर जिले के पोंडी फार्म के लोगों का गुस्सा फूटा और सड़क पर उतर आया। पूरा मामला पानी से जुड़ा हुआ है। ग्रामीण बीते 15 दिनों से खराब हैंडपंप को बनाने की अर्जी दे रहे थे, लेकिन हैंडपंप को सुधारा नहीं जा रहा था।

मंगलवार की सुबह ग्रामीणों ने परेशान होकर अमरकंटक– रीवा मार्ग को जाम कर दिया। खाली बाल्टियों के साथ ग्रामीण चिलचिलाती धूप में पानी की समस्या को लेकर धरने पर बैठ गए। जिससे कई घंटों तक यातायात बाधित रहा।

साहब! हैंडपंप की मरम्मत करवा दो

दरअसल, अनूपपुर जिले के पुष्पराजगढ़ जनपद पंचायत के ग्रामीण इलाकों में लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहें हैं। इनमें से एक सबसे बड़ी समस्या है शुद्ध पेय जल का ना होना। इसी इलाके के पोंडी फार्म में बीते 15 दिनों से हैंडपंप खराब हालत में था। इस हैंडपंप पर 35 से 40 परिवार निर्भर हैं। इसकी शिकायत लगातार PHE विभाग को की जा रही थी। लेकिन, हैंडपंप को मरम्मत के लिए विभाग की नींद नहीं खुली। 15 दिनों तक परेशान होने के बाद ग्रामीणों ने मंगलवार को रीवा– अमरकंटक मार्ग में बैठकर धरना प्रदर्शन किया।

इस हैंडपंप के खराब होने के चलते ग्रामीण पीने के पानी के लिए गांव से तीन चार किलोमीटर दूर जाते हैं और पानी लेकर आते हैं। ग्रामीणों के अनुसार एक प्राइवेट स्थान पर बोरवेल लगा हुआ जहां का पानी ग्रामीण लाते हैं और यह सिलसिला पिछले 15 दिनों से चल रहा है। ऐसे में एक तरफ जहां प्रशासन दावे कर रही हो और यह निर्देश भी हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं होनी चाहिए। इस भीषण गर्मी में यहां के लोग पीने के पानी के लिए परेशान है।

धरने में बैठने के बाद चंद घंटों में बन गया हैंडपंप

PHE विभाग की कुम्भकर्णीय नींद तब खुली जान ग्रामीणों ने मंगलवार को चक्का जाम कर दिया। चक्काजाम करने के चंद घंटों बाद ही PHE के अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की।

ग्रामीणों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को घेरा। हैंडपंप की मरम्मत का काम जो 15 दिनों से अर्जियों पर टिका हुआ था।

एक धरना प्रदर्शन करने के चंद घंटों के भीतर ही कर दिया गया। हैंडपंप की मरम्मत के बाद ग्रामीणों ने अपना धरना प्रदर्शन समाप्त किया।

देश भर में इन दिनों जल जीवन मिशन का ढिंढोरा पीता जा रहा है। लोगों के घरों तक पानी पहुंचाने का दावा सरकार और विभागीय अधिकारी कर रहें हैं। लेकिन, इन घटनाओं से साफ पता चलता है कि इन योजनाओं की जमीनी हालत क्या है।

जल जीवन मिशन के नाम पर पानी की पाइपें तो बिछा दी गई हैं लेकिन इन पाइपों से पानी की जगह केवल गरम हवा ही बाहर आती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इन योजनाओं से ग्रामीणों को फायदा हुआ है या अधिकारियों को?

विधायक-सांसद और अफसरों को ग्रामीणों की चेतावनी

ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को आखिरी चेतावनी दी है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की समस्या को लेकर कई बार स्थानीय विधायक, सांसद और प्रशासनिक अधिकारियों को आवेदन दिया गया है लेकिन, उस आवेदन को डस्टबीन में फेंक दिया जाता है।

सड़क से लेकर पानी तक हर मूलभूत सुविधा का यहां आभाव है। यदि एक सप्ताह के भीतर यहां नया हैंडपंप नहीं लगाया जाता तो हम और उग्र आंदोलन करेंगे।

आपको बता दें कि इसी क्षेत्र में सांसद हिमाद्री सिंह, कांग्रेस विधायक फंदेलाल सिंह मार्को और भाजपा के जिला अध्यक्ष हीरा सिंह श्याम का घर है। लेकिन, पूरे जिले और संभाग की चिंता करने वाले जनप्रतिनिधि अपने ही क्षेत्र के लोगों के साथ सौतेला व्यवहार कर रहें हैं। आज भी इस क्षेत्र हालत बेहद खराब स्थिति में है।

कई इलाकों में आज भी लोगों ने बिजली और मोबाइल का नेटवर्क तक नहीं देखा है। सवाल उठता है कि आखिर यह जनप्रतिनिधि किसके लिये काम कर रहें हैं?



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