रायपुर। छत्तीसगढ़ में भारत स्काउट्स एंड गाइड्स की 9 जनवरी से होने वाली राष्ट्रीय रोवर–रेंजर जंबूरी 2026 (Rover-Ranger Jamboree) अब केवल एक आयोजन नहीं रह गई है, बल्कि इसने सरकारी टेंडर प्रणाली, जेम पोर्टल की पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन, प्रशासनिक हस्तक्षेप की वजह से विवादित कार्यक्रम का रूप ले लिया है।
अब नया ड्रामा इसके स्थगित होने की खबरों और उसको भ्रामक बताने वाली सूचना के तौर पर सामने आया।
मंगलवार को दिन भर इस जंबूरी को छत्तीसगढ़ राज्य परिषद की बैठक में स्थगित किए जाने की खबरें और फिर देर शाम को इन खबरों को भ्रामक बताने वाली प्रेस विज्ञप्ति सामने आने के बाद इस जम्बूरी पर घमासान मच गया है।
जानकार सूत्रों का कहना है कि इस मामले में सरकार और रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल के बीच की दूरियां भी नजर आईं। बताते हैं कि जंबूरी के स्थगन की सूचना बृजमोहन अग्रवाल के खेमे से आई थी जबकि स्थगित नहीं होने और बुधवार को आयोजन स्थल पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की सूचना सरकार की ओर से आई है। चर्चा है कि बीजेपी की विष्णु देव साय सरकार ने अपनी ही पार्टी के एक दिग्गज सांसद के मुकाबले इस मामले में अत्यंत कनिष्ठ नेता और मंत्री गजेंद्र यादव को सामने रखा है।
बीजेपी के भीतर से आ रही खबरें बताती हैं कि सांसद और स्काउट–गाइड की छत्तीसगढ़ परिषद के अध्यक्ष बृजमोहन अग्रवाल इस आयोजन से जुड़ी भ्रष्टाचार की शिकायतों को लेकर अत्यंत अप्रसन्न हैं।
सांसद और परिषद के अध्यक्ष बृजमोहन अग्रवाल की नाराजगी की वजह बालोद जिले में प्रस्तावित इस जम्बूरी को लेकर एक के बाद एक सामने आए खुलासे हैं, जिसने पूरे आयोजन को विवादों के घेरे में ला दिया है।
टेंडर खुलने से पहले ही कंपनी ने शुरू कर दिया काम
दरअसल, इस आयोजन को लेकर वित्तीय अनियमितताओं की चर्चा 20 दिसंबर को शुरू हुई। जब जम्बूरी आयोजन से जुड़े निर्माण कार्यों का टेंडर 20दिसंबर की शाम 5:30 बजे जेम (GeM) पोर्टल पर खुलना था। लेकिन, इससे पहले ही शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज, बालोद स्थित आयोजन स्थल पर एक निजी कंपनी ने काम शुरू कर दिया।
मौके पर कंपनी के ट्रक, निर्माण सामग्री और श्रमिकों की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि काम पूरी तैयारी के साथ शुरू हो चुका था। इससे यह सवाल खड़ा हो गया कि जब टेंडर प्रक्रिया पूरी ही नहीं हुई थी, तो कंपनी को किसके आदेश पर काम शुरू करने की अनुमति दी गई।
जेम पोर्टल जैसी ऑनलाइन और कथित तौर पर पारदर्शी प्रणाली के बावजूद टेंडर की जानकारी पहले ही कैसे लीक हो गई, यह बड़ा सवाल बन गया है।
क्या अधिकारियों ने टेंडर खुलने से पहले ही कंपनी को यह भरोसा दे दिया था कि काम उसी को मिलेगा?
अगर ऐसा हुआ, तो फिर नियमों का पालन करते हुए टेंडर खुलने का इंतजार करने वाले अन्य निविदाकर्ताओं का क्या दोष था, और उनके संभावित आर्थिक नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा?
मामले को और संदिग्ध तब बना दिया जब टेंडर दस्तावेज में दर्ज संबंधित अधिकारी के मोबाइल नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन तय समय पर फोन स्विच ऑफ मिला।
इससे यह सवाल भी उठने लगे कि क्या अधिकारी जानबूझकर जवाबदेही से बचने के लिए संपर्क से दूर रहे। पूरे घटनाक्रम में पूर्व-निर्धारित ठेके और बड़े पैमाने पर लेन-देन की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं।
10 करोड़ रुपये और स्थल परिवर्तन पर परिषद की आपत्ति
इसी बीच इस आयोजन को लेकर भारत स्काउट्स एंड गाइड्स छत्तीसगढ़ राज्य परिषद की कथित बैठक 5जनवरी को आयोजित होने की खबरें आईं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बैठक की अध्यक्षता परिषद के वैधानिक अध्यक्ष एवं सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने की। बैठक में राज्य परिषद के उपाध्यक्ष और अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक बैठक में सामने आया कि पहले राज्य कार्यकारिणी और परिषद ने जम्बूरी का आयोजन नया रायपुर में करने का निर्णय लिया था, लेकिन राज्य परिषद की अनुमति के बिना स्कूल शिक्षा विभाग ने आयोजन स्थल बदलकर बालोद तय कर दिया।
परिषद ने इसे संस्था के संविधान और नियमों का उल्लंघन बताया।
बैठक में सबसे गंभीर मुद्दा 10 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि को लेकर उठा। आरोप है कि वित्त विभाग द्वारा राष्ट्रीय जम्बूरी के लिए स्वीकृत यह राशि भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के खाते में न जाकर जिला शिक्षा अधिकारी, बालोद के खाते में ट्रांसफर कर दी गई।
परिषद ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता करार देते हुए कहा कि किसी स्वायत्त संस्था के आयोजन के लिए स्वीकृत धनराशि का विभागीय खाते में जाना नियमों के खिलाफ है।
इन सभी बिंदुओं के आधार पर कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह खबर सामने आई कि छत्तीसगढ़ राज्य परिषद ने राष्ट्रीय रोवर–रेंजर जम्बूरी को स्थगित करने का फैसला लिया है, और इसी कारण आयोजन पर रोक लगाई गई है।
राज्य परिषद की बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि परिषद के निर्णय के बावजूद जम्बूरी का आयोजन किया जाता है, तो उसकी पूरी प्रशासनिक, वित्तीय और नैतिक जिम्मेदारी स्कूल शिक्षा विभाग की होगी।
दिन भर खबरों के बाद आई ‘स्थगन की खबरें भ्रामक’बताने वाली प्रेस विज्ञप्ति

हालांकि, इन रिपोर्ट्स के बाद छत्तीसगढ़ राज्य परिषद के आयुक्त इंद्रजीत सिंह खालसा ने 6जनवरी को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जम्बूरी के स्थगित किए जाने की खबरों को भ्रामक बताया।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि राष्ट्रीय रोवर–रेंजर जम्बूरी 9 से 13 जनवरी 2026 तक बालोद में आयोजित की जानी है, आयोजन की तैयारियां चल रही हैं, और सोशल मीडिया व कुछ समाचार माध्यमों में जम्बूरी स्थगित होने की खबरें पूरी तरह गलत हैं।
प्रेस विज्ञप्ति में यह भी उल्लेख किया गया कि आयोजन को लेकर विस्तृत जानकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दी जाएगी।
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