[ad_1]
लेंस डेस्क। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संसद परिसर में पश्चिम एशिया संकट पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में पाकिस्तान पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि भारत किसी भी हाल में दलाल राष्ट्र नहीं बन सकता।
इस बयान के बाद से न सिर्फ देश बल्कि पाकिस्तान तक से प्रतिक्रिया सामने आई है।
बैठक में विपक्षी नेताओं ने ईरान-अमेरिका और इजरायल से जुड़े संघर्ष में पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या पाकिस्तान के इस प्रयास को भारत के लिए कूटनीतिक झटका माना जाए।
जवाब में जयशंकर ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की यह भूमिका नई नहीं है। उन्होंने बताया कि अमेरिका 1981 से ही पाकिस्तान का इस्तेमाल ईरान के साथ संवाद बनाए रखने के लिए एक चैनल के रूप में करता आ रहा है। साथ ही 1971 में चीन-अमेरिका के बीच भी पाकिस्तान मध्यस्थता कर चुका था।
जयशंकर ने कहा, “भारत दलाल देश नहीं हो सकता। हम दूसरों के पीछे भागकर पूछते नहीं हैं कि क्या हमारी सेवाएं चाहिए।” उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत स्वतंत्र विदेश नीति पर चलता है और किसी की ‘दलाली’ या बिचौलिए की भूमिका नहीं निभाएगा।
बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हालिया बातचीत का भी जिक्र हुआ, जिसमें पीएम ने युद्ध के सभी पक्षों पर पड़ने वाले नुकसान और जल्द समाधान की जरूरत पर बल दिया।
यह बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई थी, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी समेत कई केंद्रीय मंत्री और विपक्षी दल के नेता मौजूद थे।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में कहा था कि इस्लामाबाद ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत की मेजबानी के लिए तैयार है।
इस पर विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए कि क्या भारत चुप्पी साधे हुए है, जबकि पाकिस्तान सक्रिय दिख रहा है।
सरकार ने इसे खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तान की यह ‘मध्यस्थता’ दशकों पुरानी प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसमें कोई नया कूटनीतिक लाभ नहीं है।जयशंकर के इस बयान पर पाकिस्तान की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है।
पाकिस्तानी मीडिया और विदेश कार्यालय ने जयशंकर के बयान को दुर्भावनापूर्ण करार दिया और इसे भारत की कूटनीति की कमजोरी बताने की कोशिश की।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जयशंकर खुद को एक ‘हाई-फाई दलाल’ मानते हैं। उन्होंने आगे जोड़ा कि यह टिप्पणी जयशंकर की निजी निराशा और हताशा को उजागर करती है।
इसके अलावा पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के प्रवक्ता मुर्तजा सोलांगी ने भी भारतीय विदेश मंत्री की आलोचना करते हुए कहा कि लगता है वे कूटनीतिक भूलने की बीमारी (डिप्लोमैटिक डिमेंशिया) के साथ-साथ एक आत्मघाती वायरस से भी ग्रस्त हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जयशंकर कूटनीति के स्कूल में जो कुछ भी सीखा था, वह सब भूल चुके हैं।
[ad_2]
Source link