रेपिस्ट से लड़ती नीट छात्रा की मौत पर कटघरे में Bihar Police

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पटना। बिहार की राजधानी पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहने वाली जहानाबाद की एक मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत ने पूरे बिहार में सनसनी मचा दी है। कटघरे में बिहार पुलिस (Bihar Police) है।

न्यू ईयर सेलिब्रेट करने के बाद घर से पटना लौटी छात्रा 6 जनवरी को हॉस्टल के कमरे में अचेत पाई गई। उसे पहले निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालत बिगड़ने पर पटना के प्रभात मेमोरियल ट्रॉमा हॉस्पिटल ले जाया गया। 9 जनवरी की रात को परिजनों ने उसे मेदांता हॉस्पिटल शिफ्ट किया, जहां 11 जनवरी को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

पुलिस ने शुरुआत में मेदांता हॉस्पिटल के डॉक्टरों के बयान के हवाले से दावा किया कि मौत नींद की गोलियों यानी स्लीपिंग पिल्स के अधिक सेवन से हुई। पुलिस के मुताबिक छात्रा के मोबाइल फोन में आत्महत्या के टिप्स और नींद की गोलियों के साइड इफेक्ट्स सर्च करने का इतिहास मिला। हॉस्टल के कमरे से कई स्लीपिंग पिल्स भी बरामद हुईं। छात्रा के कंधे पर जख्म का निशान भी पाया गया।

11 जनवरी को मौत के बाद शव को 12 जनवरी को मेदांता से पीएमसीएच ले जाकर पोस्टमार्टम कराया गया।

परिजनों के अनुसार रिपोर्ट में पीरियड के दौरान यौन हिंसा (सेक्सुअल असाल्ट) के स्पष्ट संकेत मिले हैं। रिपोर्ट से दुष्कर्म की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। छात्रा के शरीर पर बचाव के प्रयास के कारण 12 से ज्यादा गहरी खरोंचें मिलीं, जिनकी पुष्टि पोस्टमार्टम में हुई। हालांकि, ब्लीडिंग के कारण जांच प्रभावित हो सकती है।

पोस्टमार्टम की रिपोर्ट ने पुलिस के उन तमाम दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस घटना को शुरुआत में पटना पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी बीमारी और नींद की गोलियों की लत से जोड़कर सामान्य मौत बताने की कोशिश कर रहे थे। सोशल मीडिया पर इस केस को लेकर पटना पुलिस को लगातार सवालों के कठघरे में खड़ा कर रहे हैं।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक गर्दन और कंधे पर नाखून के घाव पाए गए। डॉक्टरों के अनुसार यह निशान तब बनते हैं जब पीड़िता खुद को बचाने की कोशिश करती है और हमलावर उसे जबरन पकड़ने या खींचने की कोशिश करता है। खरोंच के निशान पाए गए। ये निशान बताते हैं कि छात्रा को लंबे समय तक दबाया गया या जमीन पर रगड़ा गया। चोटों और खरोंचों के पैटर्न के आधार पर डॉक्टरों ने यह भी माना कि हमले में एक से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अंत में डॉक्टरों ने लिखा है कि यौन शोषण की पुष्टि होती है, जबकि मौत के अंतिम कारण को अभी तक स्पष्ट नहीं किया गया है। इसके लिए आगे की विशेषज्ञ जांच के लिए विसरा सुरक्षित रखा गया है। रिपोर्ट को एम्स भेजा गया है।

हॉस्टल के संचालक और प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल के डाक्टरों पर अभी तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

मामले की गंभीरता को देखते हुए पटना पुलिस ने विशेष जांच दल (SIT) गठित किया, जिसका नेतृत्व आईजी जितेंद्र कुमार राणा कर रहे हैं। SIT ने पटना एसपी कार्तिकेय शर्मा के साथ हॉस्टल का सघन निरीक्षण किया। पांच मंजिला इमारत में लिफ्ट और सीसीटीवी जैसी सुविधाओं के बावजूद कई कमरों के दरवाजों पर आपत्तिजनक शब्द लिखे मिले। परिसर में संदिग्ध सामान भी बरामद हुए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यौन हिंसा के संकेत मिलने के बाद पुलिस के इन बयानों पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। यह भी पूछा जा रहा है कि आखिर किन परिस्थितियों में छात्रा की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।

बढ़ते दबाव के बाद पुलिस ने हॉस्टल मालिक मनीष कुमार रंजन को गिरफ्तार कर लिया। दुष्कर्म की पुष्टि और गिरफ्तारी की खबर फैलते ही लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई देने लगा। छात्र संगठनों और आम नागरिकों ने न्याय की मांग को लेकर विरोध मार्च निकाल रहे हैं।

छात्र संघ से जुड़े दिलीप ने कहा है कि, “जहानाबाद की बेटी NEET छात्रा की पटना मे रेप और हत्या मामले में परिजनों के गंभीर आरोप के बाद भी गर्ल्स हॉस्टल के संचालक और प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल के डाक्टरों पर अभी तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?”

क्या इस केस का भी हश्र उत्तराखंड की अंकिता भंडारी हत्या वाला होगा?

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुपम ने कहा कि, ‘पुलिस द्वारा परिजनों की आशंका और आरोपों को हल्के में लेना और पोस्ट मॉर्टम रिपोर्ट आने से पहले ही खुदकुशी बताकर केस को रफा दफा करने का प्रयास निंदनीय है। स्पष्ट है कि इस मामले में पुलिस या तो आरोपियों को बचाना चाहती थी या उनकी प्रशिक्षण में ही कमी है।’

अनुपम ने कहा, ‘डबल इंजन सरकार से हमारी मांग है कि आरोपियों को स्पीडी ट्रायल करवाकर जल्द से जल्द सजा दी जाए। इसके अलावा पटना के छात्रावास की सघन सुरक्षा जांच हो। आम तौर पर ऐसे मामलों को पुलिस और हॉस्टल मालिकों की सांठगांठ से बिना जवाबदेही के निपटा दिया जाता है। चुनाव के दौरान दस दस हजार रुपए बांटकर महिलाओं का वोट लेने वाले बेईमानों से अपील है कि थोड़ा बहुत ध्यान महिला सुरक्षा पर भी दें।’

राजद प्रवक्ता कंचन यादव ने कहा, ‘जहानाबाद की एक बेटी के साथ पटना में बलात्कार हुआ, फिर उसकी हत्या कर दी गई। बिहार पुलिस ने पहले नशे में आत्महत्या का मामला बना दिया। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद यह बलात्कार का मामला बताया जा रहा है। बिहार सरकार और उनकी पुलिस बेटी को इंसाफ दिलाने के बजाय उसी को फँसाने में लगी हुई थी। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ बार-बार बोला जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत क्या है?’

वरिष्ठ पत्रकार नरेंद्र नाथ मिश्र लिखते हैं कि, ‘बिहार की राजधानी पटना में गर्ल्स हॉस्टल में मेडिकल परीक्षा की तैयारी कर रही लड़की की हत्या और उसके साथ सेक्सुअल असॉल्ट की घटना में अब तक पुलिस-प्रशासन की पूरी कोशिश अपराधी को पकड़ने के बजाय इस पर परदा डालना अधिक लग रहा है। कौन बड़े लोग इसमें शामिल हैं जिसे बचाने के लिए  पुलिस बार-बार कहानी बदल रही है? क्या इस केस का भी हश्र उत्तराखंड की अंकिता भंडारी हत्या वाला होगा?’ 

सांसद पप्पू यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को शंभू गर्ल्स हॉस्टल केस को CBI से जांच और पटना के महेंद्रु में चल रहे लड़का-लड़कियों का मिश्रण हॉस्टल अवैध रूप चलाने वालो पर FIR करने के लिए पत्र लिखा है। वहीं जहानाबाद पहुंच कर प्रशांत किशोर ने परिजनों से मुलाकात की। 

जहानाबाद की इस छात्रा के लिए बिहार में सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक पर लोग उतरने लगे हैं। जाहिर है कि ये मामला सरकार के लिए भारी मुश्किल बनने की राह पर है।

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