रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित श्री महामाया देवी मंदिर सार्वजनिक न्यास समिति द्वारा 19 जनवरी से गुप्त नवरात्रि के पावन पर्व पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव के पांचवें दिन वृंदावन वासी आचार्य मारुति नंदन आचार्य जी वागीश महाराज ने कहा कि किचन में 24 घंटे किच किच होता है। यदि उसे रसोई घर बना ले, तो 24 घंटा रस मिलेगा। रसोई घर को अन्नपूर्णा का घर, महामाया का घर बनाओ वहां बनने वाला भोजन प्रसाद बन जाएगा। रसोई का प्रसाद समूचे परिवार का भविष्य है, जैसा अन्न होगा वैसा मन होगा। जैसा पानी है वैसी वाणी है। अन्न बिना भोग लगाएं नहीं करना चाहिए। बिना भोग लगाएं भोजन विष बन जाता है। प्रसाद ही प्रभु की प्रसन्नता है। भोजन में तुलसी डाल दो तो प्रसाद बन जाता है। ठाकुर जी की सेवा मनसा वाचा कर्मणा करना चहिए। बसंत पंचमी की व्याख्या करते हुए महाराज श्री ने कहा जहां वासनाओं का अंत हो वही बसंत है। सब के पति कृष्ण ही है। इसलिए कलयुग में सबके पति कागज के पुतले जैसा है। पति का अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा पालनकर्ता, पालनहार ही पति है। इसलिए सभी के पति श्री कृष्णा ही हैं। महाराज श्री ने महाकाली, महालक्ष्मी, महा सरस्वती का वर्णन करते हुए तीनों के तेज पूर्ण ही राधा है। योग माया ही महामाया है। श्री कृष्ण ने महा लीला किया, तब उन्होंने योग माया का आश्रय लिया। योगमाया ही महामाया है। इसलिए प्रभु का आश्रय लिया है। वृंदावन में महामाया योग माया ही श्री राधा है। उन्होंने श्री कृष्ण से राधा जी को 11 महीने 15 दिन बड़े होने का रहस्य उद्घाटित किया। राधा जी के जन्म के बाद 11 महीने 15 दिन तक उनकी आंखें नहीं खुली। सब कुछ करने के बाद भी बड़े-बड़े बैद्य बुलाए गए। जन्म हुआ किंतु नेत्र नहीं खुला। जब प्रभु का जन्म हुआ और उन्हें पालने में लेकर प्रभु के दर्शन के लिए ले गए तब श्री राधा ने श्री कृष्ण का दर्शन किया और उसी दिन राधा जी के आंखें खुली। आज भी विंध्याचल में विंध्यवासिनी के रूप में योग माया विराजमान है। नंद बाबा ने सात तिल का पहाड़ बनाया। जिसमें हीरा मोती जवाहरात सोना आदि छुपा कर रखें और उसे ही दान किंए महाराज श्री ने कहा दान गुप्त रूप से होना चाहिए। प्रचार प्रसार किया गया दान सफलीभूत नहीं होता। पूतना की कथा बताते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रीकृष्ण का स्वभाव है कि जो उन्हें विष पिलाते हैं उनको भी मुक्ति प्रदान करते हैं। हमारा हृदय ही भगवान का प्लेग्राउंड है। आप किस प्लेग्राउंड में खेलना चाहेंगे जो मैदान साफ सुथरा हो उस मैदान में खेलना चाहेंगे। प्रभु वही विराजमान होंगे, जिनका हृदय साफ होंगा। उन्होंने व्यास पीठ से 23 जनवरी को राजधानी में भारतीय टीम के क्रिकेट मैच को विजयश्री प्राप्त करने की प्रभु से कामना किया। पूतना के मृत्यु के बाद उनका शव जलने के बाद भी उससे सुगंध आया। बाकी शव के जलने से दुर्गंध आती है। प्रभु ने जिसका स्पर्श कर लिया उसके शव से दुर्गंध नहीं सुगंध ही आएंगे। गौ माता के शरीर में अनेक देवी देवता विराजमान है। लक्ष्मी जी को आने में विलंब हो गया। लक्ष्मी जी के लिए कोई स्थान नहीं था। तब गौ माता ने कहा कि गोबर ही एक ऐसा है जो रिक्त है। लक्ष्मी जी ने कहा मैं गोबर में ही वास करूंगी। इसीलिए सनातन धर्म में पूजा पाठ धर्म कर्म में गोबर से लीपा जाता है। राम से बड़ा राम का नाम है। नंद बाबा ने लाल को नजर ना लगे इसलिए नजर उतारा। गौशाला में जाकर गाय के खुर की मिट्टी को बच्चे के माथे में लगाने से सब जादू टोना बच्चों को छोड़कर भाग जाते हैं। गर्गाचार्य ने लाला का नाम श्री कृष्णा किया। कृष्ण कौन है कर्ष अर्थात आपकी ओर आकर्षित करने वाला। जैसे किसान खेत में धान होता है वैसी अपने हृदय में भक्ति का बीज बोए। राम बसंत ऋतु में आए थे कृष्णा वर्षा ऋतु में आए। एक दिन में और एक रात में जन्म लिए। इसका अर्थ है राम दिन में विश्राम के समय आए ताकि सबको विश्राम मिले वही श्री कृष्णा रात्रि में आए ताकि सोए हुए मोह निशा में पड़े हुए को जगाया जाए। इसलिए राम का नाम सीधा तो उनका काम भी सीधा है। कृष्ण का नाम टेढ़ा तो उनका काम भी टेढ़ा-मेढ़ा है। महामाया मंदिर न्यास समिति के अध्यक्ष व्यास नारायण तिवारी, कार्यक्रम समन्वयक चन्द्र शेखर दुबे एवं मंदिर व्यवस्थापक पं विजय कुमार झा ने कहा है कि आज 24 जनवरी को रुक्मणी विवाह का पावन प्रसंग होगा। जिनके संतानों का विवाह नहीं हो पा रहा है, महामाया मंदिर रूपी वृंदावन में आ जाएं सभी मनोकामना पूर्ण होगी।

