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कौशाम्बी। जिले के स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में महिला मरीज की निजता से खिलवाड़ का सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ऑपरेशन थिएटर जैसी अति संवेदनशील जगह से महिला मरीज की तस्वीर वायरल होने के बावजूद अब तक किसी जिम्मेदार व्यक्ति पर ठोस कार्रवाई न होना पूरे मामले को संदेह के घेरे में खड़ा कर रहा है। सवाल उठ रहा है कि आखिर प्रशासन किसे बचाने में जुटा है?जानकारी के अनुसार 22 वर्षीय महिला मरीज को 26 अप्रैल को मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग में भर्ती कराया गया था। प्रधानाचार्य डॉ. हरिओम कुमार सिंह के निर्देशन और विभागाध्यक्ष डॉ. विशाख दीक्षित की देखरेख में चिकित्सकीय टीम ने महिला का ऑपरेशन किया। सर्जरी के दौरान स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. वर्षा केसरी, निश्चेतक दल और वरिष्ठ ओटी स्टाफ मौजूद था। बार्थोलिन सिस्ट की सर्जरी के बाद मासुपियलाइजेशन प्रक्रिया की गई।इसी दौरान ऑपरेशन थिएटर के भीतर की एक संवेदनशील तस्वीर बाहर पहुंच गई। वायरल तस्वीर में महिला मरीज का चेहरा और निजी अंग स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। तस्वीर सामने आते ही पूरे जिले में हड़कंप मच गया। मामला सीधे तौर पर महिला की गरिमा, निजता और चिकित्सा व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा होने के कारण लोगों में भारी आक्रोश है।घटना का संज्ञान लेते हुए राज्य महिला आयोग की सदस्य प्रतिभा कुशवाहा ने पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर कठोर कार्रवाई की मांग की। इसके बाद एसपी के निर्देश पर सिविल लाइंस चौकी प्रभारी अशोक यादव की तहरीर पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया। हालांकि मुकदमा दर्ज होने के बाद भी अब तक किसी कर्मचारी, चिकित्सक या ओटी स्टाफ पर प्रत्यक्ष कार्रवाई नहीं हुई है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि ऑपरेशन थिएटर में बाहरी व्यक्ति के प्रवेश की संभावना लगभग न के बराबर होती है, फिर तस्वीर किसने ली? किस उपकरण से ली गई? किसकी अनुमति से मोबाइल अंदर पहुंचा? और अस्पताल के भीतर से यह फोटो सोशल मीडिया तक कैसे पहुंच गई? इन सवालों का जवाब अब तक प्रशासन नहीं दे सका है।तत् समय डीएसपी मंझनपुर शिवांक सिंह ने बताया था कि ऑपरेशन के दौरान मौजूद सभी लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और यह पता लगाया जा रहा है कि तस्वीर किसने खींची और वायरल की। संबंधित व्यक्तियों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।इधर, मेडिकल कॉलेज प्रशासन की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है। इतनी गंभीर घटना के बावजूद किसी अधिकारी या कर्मचारी को निलंबित न किए जाने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों की गोपनीयता और सम्मान की रक्षा को लेकर यह मामला अब बड़ी बहस का विषय बन गया है।स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि ऑपरेशन थिएटर जैसी सुरक्षित जगह पर भी महिला मरीज की गरिमा सुरक्षित नहीं है, तो यह पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए शर्मनाक स्थिति है। लोगों ने दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी, कड़ी दंडात्मक कार्रवाई और मेडिकल कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
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