नई दिल्ली। नर्मदा बचाओ आंदोलन की अगुवा और सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर (Medha Patkar) को लंबे समय से चल रहे मानहानि के मामले में नई दिल्ली की साकेत कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। शनिवार को फर्स्ट क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट राघव शर्मा ने फैसला सुनाते हुए मेधा पाटकर को बरी कर दिया।
यह मामला दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना द्वारा दायर किया गया था, जिसमें आरोप था कि अप्रैल 2006 में एक टेलीविजन कार्यक्रम (इंडिया टीवी) में मेधा पाटकर ने उनके खिलाफ मानहानिकारक टिप्पणियां की थीं। केस लगभग 20 साल पुराना था और 2006 के उस बयान पर आधारित था।
कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता (सक्सेना) पक्ष आरोपों को साबित करने में नाकाम रहा। अभियोजन पक्ष मूल वीडियो फुटेज, रिकॉर्डिंग डिवाइस या उस कार्यक्रम के रिपोर्टर को गवाह के रूप में पेश नहीं कर सका, जिससे बयानों की प्रामाणिकता सिद्ध नहीं हो सकी। मजिस्ट्रेट ने कहा कि सबूतों की कमी के कारण मामले को साबित नहीं किया जा सका, इसलिए आरोपी को दोषमुक्त घोषित किया जाता है।
अदालत ने माना कि मेधा पाटकर उस टीवी शो में लाइव पैनलिस्ट नहीं बैठी थीं, बल्कि केवल उनका पूर्व-रिकॉर्डेड वीडियो हिस्सा ही कार्यक्रम में प्रसारित किया गया था।
यह फैसला मेधा पाटकर के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पहले वी.के. सक्सेना द्वारा दायर एक अन्य मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा को बरकरार रखा था (अगस्त 2025 में) लेकिन इस अलग केस में कोर्ट ने उन्हें पूरी तरह निर्दोष ठहराया।
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