[ad_1]

लखनऊ । लगातार बढ़ती गर्मी और लू के प्रकोप को देखते हुए प्रदेश में विद्यालयों के समय में बदलाव किया गया है। नए आदेश के अनुसार अब सभी स्कूल सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक संचालित होंगे। वहीं शिक्षकों को दोपहर 1:30 बजे तक विद्यालय में उपस्थित रहना अनिवार्य किया गया है।
यह निर्णय छात्रों को भीषण गर्मी और तेज धूप से राहत देने के उद्देश्य से लिया गया है, ताकि वे सुरक्षित और अनुकूल वातावरण में पढ़ाई कर सकें। प्रशासन ने सभी संबंधित विद्यालयों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि नए समय का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
अधिकारियों के अनुसार, गर्मियों में स्कूल समय में बदलाव का मुख्य उद्देश्य बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा और उनकी पढ़ाई को प्रभावित होने से बचाना है। दोपहर के समय चलने वाली तेज धूप और लू के कारण बच्चों के बीमार पड़ने की आशंका बढ़ जाती है, ऐसे में सुबह के समय पढ़ाई को अधिक सुरक्षित माना गया है।
इस बीच, शैक्षिक संगठनों ने भी स्कूलों के शैक्षणिक घंटों को लेकर अपनी मांगें उठाई हैं। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, प्राथमिक संवर्ग ने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में समय निर्धारण को लेकर आरटीई-2009 के प्रावधानों के अनुसार व्यवस्था लागू करने की मांग की है। संगठन ने इस संबंध में प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा विभाग और महानिदेशक स्कूल शिक्षा को ज्ञापन भी भेजा है।
प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने कहा कि अत्यधिक लंबे समय तक बच्चों को स्कूल में रखना उनके मानसिक और शारीरिक विकास के लिए उचित नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि गर्मी में स्कूल का समय अधिकतम चार घंटे और सर्दी में पांच घंटे से अधिक नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, बच्चों की मानसिक ऊर्जा सीमित होती है और लंबे समय तक पढ़ाई से उन पर मानसिक दबाव बढ़ता है।
प्रदेश महामंत्री प्रदीप तिवारी ने आरटीई अधिनियम का हवाला देते हुए बताया कि कक्षा 1 से 5 तक के लिए 200 कार्यदिवस और 800 घंटे तथा कक्षा 6 से 8 तक के लिए 220 कार्यदिवस और 1000 घंटे निर्धारित किए गए हैं। ऐसे में विद्यालयों का समय इन्हीं मानकों के अनुरूप होना चाहिए।
प्रदेश मीडिया प्रभारी बृजेश श्रीवास्तव ने कहा कि संगठन ने यह भी सुझाव दिया है कि गर्मी में सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक लगभग साढ़े चार घंटे का समय पर्याप्त है, जबकि सर्दियों में पांच घंटे का समय उपयुक्त रहेगा। इससे बार-बार मौसम के अनुसार समय बदलने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी और एक स्थायी व्यवस्था लागू हो सकेगी।
कुल मिलाकर, प्रशासनिक आदेश और शिक्षाविदों की मांग दोनों ही इस बात पर जोर दे रहे हैं कि बच्चों की सुरक्षा और उनके मानसिक-शारीरिक विकास को ध्यान में रखते हुए स्कूलों के समय का संतुलन जरूरी है। यह बदलाव आने वाले दिनों में छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए राहत देने वाला माना जा रहा है।
[ad_2]
Source link