भाजपा की खबर लीक कैसे हुई, कांग्रेस का घर बचा कैसे?

NFA@0298
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रायपुर। छत्तीसगढ़ से राज्य सभा चुनाव की तस्वीर अब साफ है। एक सीट सत्तारूढ़ भाजपा और एक सीट कांग्रेस पार्टी को जाएगी। लेकिन, राजनीतिक गलियारे में एक दिलचस्प सवाल उछल रहा है कि भाजपा के पूर्व विधायक नवीन मार्कण्डेय ने नामांकन फॉर्म क्यों लिया था और लिया था तो नामांकन दाखिल क्यों नहीं किया?

कहानी, जो अब केवल सवालों में सिमट गई है,यह है कि नवीन मार्कण्डेय ने नामांकन पत्र एक रणनीति के तहत खरीदा था। नवीन मार्कण्डेय भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रदेश के प्रभारी महामंत्री हैं। इस कद का कोई नेता कम से कम भाजपा जैसी पार्टी में व्यक्तिगत पसंद से फैसला नहीं करता।

हल्ला हुआ कि भाजपा क्या छत्तीसगढ़ की दोनों सीटें पाने की जुगत जमा रही है? क्या भाजपा की तरफ से कांग्रेस पार्टी में क्रॉस वोटिंग करवाने की कोशिशें हो सकती थीं?

यह हल्ला कांग्रेस के भी कानों तक पहुंचा और पार्टी चौकन्नी हो गई। खबर है कि नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने अपने घर को सुरक्षित रखने के लिए कमर कस डाली। चर्चा है कि कांग्रेस पार्टी ने बाकायदा अपने ऐसे सात विधायकों की पहचान कर ली थी जो कमजोर कड़ी हो सकते थे। ‘द लेंस’ ने ही इस पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी।

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पार्टी के एक नेता ने कहा कि आशंका यह थी कि ऐसे विधायक जिन्हें अगली बार टिकट ना मिलने की या टिकट मिलने पर चुनाव जीत पाने की ही उम्मीद नहीं थी उन पर सत्तारूढ़ खेमा डोरे डाल सकता है।इस नेता ने नाम ना देने की शर्त पर कहा – ‘ चर्चा क्या,हमें तो इस बात की भनक थी कि क्या कोशिशें चल रही हैं ! ’

तो फिर ऐसा क्या हुआ कि भाजपा के नवीन मार्कण्डेय ने पैर पीछे खींच लिए ?

इस सवाल के दिलचस्प जवाब आए हैं।

पहला जवाब श्री मार्कण्डेय का – ‘एहतियात के तौर पर फॉर्म ले लिया था। पार्टी का फैसला हुआ कि नहीं भरना है तो नहीं भरा।’

यहां भाजपा के लिए एहतियात तो यही हो सकता था कि यदि किसी कारण से पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार का नामांकन पत्र रद्द हो जाए तो एक डमी उम्मीदवार मैदान में रहे जिसे पार्टी अपना अधिकृत उम्मीदवार घोषित कर सकती। आमतौर पर किसी भी चुनाव में डमी उम्मीदवार ऐसे ही कारणों से मैदान में होते हैं।

यह कारण तो अभी भी मौजूद है।अभी तो नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी होनी है। कहीं नामांकन पत्र खारिज हुआ तो? हालांकि
पार्टी जानती है कि ऐसा होगा नहीं।

तो फिर पार्टी ने डमी क्यों नहीं उतारा?

दूसरा जवाब पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता सांसद संतोष पांडे का। श्री पांडे कहते हैं – ‘वैसे तो मुझे पता नहीं है कि भाजपा की ओर से दूसरा फॉर्म भी लिया गया था लेकिन हमारी पार्टी में अनुशासन है। जब तक पार्टी नहीं कहेगी कोई फॉर्म नहीं भर सकता।’

भाजपा सूत्रों से ही पता चला कि पार्टी में इस बात को लेकर नाराजगी है कि दूसरे नामांकन पत्र लिए जाने की खबर लीक कैसे हुई?

दरअसल नामांकन पत्र लेने के लिए मंत्री केदार कश्यप ही लक्ष्मी वर्मा और नवीन मार्कण्डेय के साथ विधानसभा गए थे। लक्ष्मी वर्मा के लिए श्री कश्यप ने नामांकन पत्र लिया और नवीन मार्कण्डेय ने अपने खुद के लिए।

अब कहा जा रहा है कि पार्टी अपने स्तर पर इस बात की खोजबीन कर रही है कि दूसरे नामांकन पत्र लिए जाने की बात लीक कैसे हुई? बताते हैं कि नवीन मार्कण्डेय को ही सबसे ज्यादा सवालों का सामना करना पड़ रहा है।

भाजपा सूत्रों का कहना है कि दूसरे नामांकन पत्र लिए जाने की खबर के लीक होने से इस खेल का सरप्राइज़ एलिमेंट ही खत्म हो गया था और पार्टी में माना यह जा रहा है कि इससे कांग्रेस के कान खड़े हुए और उसे अपना घर बचाने का मौका मिल गया।

अब भाजपा से लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस से दुबारा फूलोदेवी नेताम का राज्य सभा पहुंचना तय हो गया है।

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