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ट्रक ऑपरेटरों ने भी दी अनिश्चितकालीन चक्काजाम की चेतावनी
बिलासपुर, 16 मई। बिलासपुर जिले में पेट्रोल-डीजल संकट और सप्लाई बाधित होने के बीच अब डीजल की असामान्य खपत ने प्रशासन को चौकन्ना कर दिया है। कालाबाजारी की आशंका को देखते हुए कलेक्टर संजय अग्रवाल ने चार पेट्रोल पंप संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। दूसरी ओर ट्रक ऑपरेटरों ने तेल संकट, बढ़ती लागत और कथित सिंडिकेट व्यवस्था के खिलाफ 23 मई से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन चक्का जाम की चेतावनी दे दी है।
खाद्य शाखा की समीक्षा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कुछ पेट्रोल पंपों में डीजल बिक्री पिछले वर्ष की औसत मासिक बिक्री की तुलना में 100 प्रतिशत से लेकर 337 प्रतिशत तक अधिक दर्ज की गई। प्रशासन को आशंका है कि उपभोक्ता श्रेणी के लिए उपलब्ध डीजल को औद्योगिक उपयोगकर्ताओं की ओर मोड़ा जा रहा है, जिससे सामान्य आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
जिन पेट्रोल पंपों को नोटिस जारी किया गया है उनमें तखतपुर के छतौना स्थित मां कावेरी फ्यूल्स (बीपीसीएल) में 138 प्रतिशत अधिक बिक्री, बिल्हा के धौराभाठा स्थित सेठ मूलचंद एंड संस (बीपीसीएल) में 100 प्रतिशत वृद्धि, गतौरा स्थित जय मां श्री यंत्र फ्यूल्स (आरओसीएल) में 337 प्रतिशत अधिक मांग और बिक्री तथा तखतपुर के अमसेना स्थित सौरभ सर्विस स्टेशन (आईओसीएल) में 246 प्रतिशत अधिक डीजल बिक्री दर्ज की गई है।
प्रशासन ने सभी संचालकों को तीन दिन के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। उनसे पूछा गया है कि इतनी बड़ी मात्रा में डीजल किन उपभोक्ताओं को बेचा गया और उसकी वास्तविक आवश्यकता क्या थी।
खाद्य शाखा ने पहले ही पेट्रोल पंप संचालकों को अनधिकृत कंटेनरों में पेट्रोल-डीजल नहीं देने और सीसीटीवी निगरानी अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद बिक्री के असामान्य आंकड़े सामने आने के बाद प्रशासन अब कड़ी कार्रवाई की तैयारी में है।
उधर, डीजल की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति संकट के बीच छत्तीसगढ़ ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन ने सरकार और तेल कंपनियों पर ट्रांसपोर्ट व्यवसाय को खत्म करने की साजिश का आरोप लगाया है। एसोसिएशन ने सात दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि उनकी मांगों पर लिखित आदेश जारी नहीं किए गए तो 23 मई से राज्यभर में अनिश्चितकालीन चक्का जाम शुरू कर दिया जाएगा।
इस आंदोलन का असर सीमेंट प्लांट, कोयला खदानों, मंडियों और औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
एसोसिएशन ने सीमेंट, स्टील और कोल सेक्टर की बड़ी कंपनियों पर माल भाड़ा दरों को पूरी तरह नियंत्रित करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि राज्य के 80 प्रतिशत ट्रक मालिक एक या दो गाड़ियों के सहारे परिवार चला रहे हैं, लेकिन मौजूदा हालात ने हजारों परिवारों को आर्थिक संकट में धकेल दिया है।
ट्रक ऑपरेटरों ने आरोप लगाया कि कई जिलों के पेट्रोल पंपों पर डीजल खत्म हो चुका है और ड्राइवर घंटों लाइन में लगने के बाद भी ईंधन नहीं पा रहे हैं। एसोसिएशन ने तेल कंपनियों और डीलरों की मिलीभगत से सप्लाई प्रभावित करने तथा जमाखोरी की जांच की मांग की है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष ईश्वर सिंह चंदेल ने कहा कि डीजल महंगा होने से ट्रिप लागत 30 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है, लेकिन भाड़ा दरों में कोई संशोधन नहीं हुआ। छोटे ट्रक मालिक कर्ज में डूब रहे हैं और कई लोगों को अपने वाहन बेचने की नौबत आ गई है। ट्रक ऑपरेटरों की प्रमुख मांगों में डीजल पर वैट में कम से कम 8 रुपये प्रति लीटर की कमी करना, डीजल कीमत से जुड़ी स्वचालित भाड़ा संशोधन नीति लागू करना, बड़े औद्योगिक संयंत्रों में सिंडिकेट व्यवस्था खत्म करना तथा 48 घंटे के भीतर राज्यभर में डीजल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना शामिल है।
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