छत्तीसगढ़ की राज्य सरकार की मेहरबानी से सरकारी विमान से सतना से भिलाई एक प्रवचन देने आए धीरेंद्र शास्त्री ने पत्रकारों को जो नसीहत दी है, उसे उन्हें सत्ता से मिले संरक्षण से ही जोड़ कर देखना चाहिए।
धीरेंद्र शास्त्री का एक वीडियो वायरल है, जिसमें वह पत्रकारों को नसीहत देते नजर आ रहे हैं कि, जिस पत्रकार को खुजली हो वह प्रश्न कर सकता है।
अव्वल तो इस पर गौर किया जाना चाहिए कि धीरेंद्र शास्त्री को कैसे कुछ बरसों के भीतर खासतौर से केंद्र की भाजपा सरकार और भाजपा शासित राज्यों में लगभग राजकीय मेहमान जैसा दर्जा दिया जा रहा है। भाजपा की ही बात करें, तो उमाभारती बचपन से प्रवचन देती थीं, लेकिन याद नहीं पड़ता कि राजनीति में आने और मुख्यमंत्री तथा केंद्रीय मंत्री पदों पर रहने के बावजूद उन्होंने पत्रकारों से इस स्तर पर जाकर बात की।
भारत धार्मिक आस्थाओं और ऋषि-मुनियों की परंपराओं का देश है, जहां त्याग से संतत्व की प्राप्ति के अनेक आख्यान मौजूद हैं। इसके उलट धीरेंद्र शास्त्री की चर्चा उनकी वैभवपूर्ण जीवनशैली और सत्ता से उनकी करीबी के रूप में ही होती है।
निश्चित ही इस तरह के वह अकेले बाबा नहीं हैं, और न ही भाजपा की सरकार से पहले कांग्रेस या अन्य दलों की सरकारों के समय ऐसे बाबाओं को सत्ता का संरक्षण नहीं मिला है। पीछे लौटें तो ऐसे अनेक बाबाओं और स्वामियों के नाम मिल जाएंगे जिनमें धीरेंद्र ब्रह्मचारी से लेकर चंद्रास्वामी जैसे नाम शामिल हैं।
आसाराम बापू और राम रहीम से लेकर ऐसे अनेक और बाबा हैं, जिन्होंने सत्ता के संरक्षण में अपने अनाचार का विस्तार किया और जेल की हवा तक खा चुके हैं।
दरअसल ऐसे बाबाओं ने भारतीय अध्यात्म की चिंतन परंपरा की गरिमा को ठेस ही पहुंचाई है। यह नहीं भूलना चाहिए कि शास्त्रार्थ भारतीय चिंतन परंपरा का अहम हिस्सा है। ऐसे में धीरेंद्र शास्त्री पत्रकारों से कह रहे हैं कि खुजली हो तो प्रश्न पूछे लें। इसे उनका अहंकार क्यों न माना जाए?
मगर सवाल यही है कि धीरेंद्र शास्त्री ने ऐसा क्यों कहा?
इसका जवाब पत्रकारिता पर चौतरफा छाए संकट में तलाशा जा सकता है, जहां पत्रकारों से कहा जा रहा है कि वे सवाल न करें।
भारत प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में 180 देशों में 151 वें स्थान पर है, तो इसकी सबसे बड़ी वजह यही है कि पत्रकारों को सवाल पूछने से रोका जा रहा है या फिर खुद पत्रकार सवाल नहीं कर रहे हैं।
क्या धीरेंद्र शास्त्री भूल गए हैं कि भारत एक संवैधानिक लोकतांत्रिक देश है, जहां सबकी जवाबदेही तय है। प्रश्न से परे कोई नहीं है। धीरेंद्र शास्त्री भी।

