
ढाका । बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। फेंगुआ जिले के दागनभुआ इलाके में 28 वर्षीय हिंदू युवक समीर दास की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। हमलावर युवक का बैटरी ऑटो रिक्शा लूटकर फरार हो गए। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब बीते महज 25 दिनों में बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या की यह आठवीं वारदात बताई जा रही है।
समीर दास रामानंदपुर गांव का निवासी था और लंबे समय से बैटरी ऑटो चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। रविवार रात जब वह तय समय पर घर नहीं लौटा तो परिजनों को अनहोनी की आशंका हुई। रातभर तलाश के बाद पुलिस को सूचना दी गई। देर रात करीब दो बजे दक्षिण करीमपुर मुहुरी बाड़ी के पास सड़क किनारे समीर का लहूलुहान शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
पुलिस के अनुसार हत्या सुनियोजित तरीके से की गई। थाना प्रभारी फैयाजुल अजीम नोमान ने बताया कि परिजनों की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए फेनी जनरल अस्पताल भेजा गया है।
स्थानीय पुलिस और सूत्रों के मुताबिक यह घटना 11 जनवरी की शाम की है। समीर अपने माता-पिता कार्तिक कुमार दास और रीना रानी दास का सबसे बड़ा बेटा था। घटनास्थल से ऑटो रिक्शा के गायब होने के कारण लूटपाट के इरादे से हत्या की आशंका जताई जा रही है, हालांकि अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के बीच डर और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि कमजोर कार्रवाई और न्याय में देरी के चलते अल्पसंख्यक समुदाय खुद को असहाय महसूस कर रहा है। एक के बाद एक हो रही हत्याएं यह सवाल खड़ा कर रही हैं कि आखिर बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक कितने सुरक्षित हैं?

