रानीतराई। छत्तीसगढ़ प्रकृति के दर्शन और छत्तीसगढ़ की धरोहर ,सभ्यता,धार्मिक व पर्यटन स्थलों की जानकारी पाने की ललक और जिज्ञासा ने पाटन अंचल के रानीतराई पूर्वी कंप्यूटर और श्री कोचिंग क्लासेस छात्रों ने दो दिवसीय बस्तर प्रवास कर पर्यटन स्थल और दार्शनिक स्थल भ्रमण का आयोजन कर अपने राज्य के विरासत सभ्यता के जानने का प्रयास किया । इस भ्रमण में 120 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। संस्था के संचालक हिमांशु साहू ,सोमप्रकाश यादव ने बताया कि भ्रमण के लिए बस्तर का चुनाव किया गया था, क्योंकि बस्तर प्राकृतिक सौंदर्य और मनोरम दृश्य से भरा हुआ छत्तीसगढ़ राज्य का अहम क्षेत्र है।
छात्रों को लेकर यात्रा का शुभारंभ केशकाल घाटी से बस्तर के चित्रकोट से हुआ जहां छात्रों ने जलप्रपात का अत्भुत दृश्य तथा बोटिंग का लुफ्त उठाया। तत्पश्चात छात्रों का दल बारसुर के गणेश मंदिर और मामा-भांजा मंदिर के दिव्य स्वरूप का दर्शन प्राप्त किए।
द्वितीय दिवस दंतेवाड़ा के मां दंतेश्वरी मंदिर के दर्शन के साथ प्रारंभ हुआ जिसके बाद दंतेश्वरी मंदिर के समीप बाबा भैरव के दर्शन के लिए छात्र आगे बढ़े। मान्यता है कि दंतेश्वरी मां के दर्शन के बाद यदि बाबा भैरव के दर्शन नहीं किए तो माता का दर्शन अधूरा माना जाता है। इसके बाद छात्रों का काफिला तीरथगढ़ जलप्रपात पहुंचा तत्पश्चात कांगेर घाटी के अन्तर्गत बांबु राफ्टिंग का आनंद लेने के बाद वापस घर के लिए रवाना हुए। यात्रा के दौरान बच्चों में काफी उत्साह दिखा,यात्रा के बाद सभी छात्रों ने शिक्षकों का आभार प्रकट किया। श्री कोचिंग क्लासेस और पूर्वी कंप्यूटर रानीतराई ,असोगा और बेल्हारी में संचालित है जो कि प्रतिवर्ष छत्तीसगढ़ के अलग अलग अंचलों का छात्रों को भ्रमण कराकर जानकारी प्रदान करते है ।

