पाटन। जनपद पंचायत क्षेत्र में पदस्थ पंचायत सचिव महेंद्र साहू के खिलाफ विरोध का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब यह विरोध ग्राम भरर तक पहुंच गया है, जहां पंचायत प्रतिनिधियों ने उनके कार्यों को लेकर नाराजगी जताते हुए खुलकर विरोध शुरू कर दिया है।
ग्राम पंचायत भरर की सरपंच कौशिल्या साहू ने जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी पाटन को ज्ञापन सौंपकर संबंधित सचिव को ग्राम पंचायत में पदस्थ नहीं करने की मांग की है।
गौरतलब हो कि पंचायत सचिव महेंद्र साहू इन दिनों अपने काम से ज्यादा लगातार हो रहे तबादलों को लेकर चर्चा में हैं। स्थिति यह है कि महज 38 दिनों के भीतर उनका तीसरी बार स्थानांतरण आदेश जारी हो चुका है। क्षेत्र में लोग अब तंज कसते हुए कहने लगे हैं कि सचिव से ज्यादा तो उनकी तबादला फाइलें यात्रा कर रही हैं।
मामला ग्राम पंचायत पतोरा से शुरू हुआ, जहां पंचायत प्रतिनिधियों ने उनके स्थानांतरण की मांग करते हुए पंचायत भवन में तालाबंदी की चेतावनी तक दे दी थी। इसके बाद 2 फरवरी को आदेश जारी कर उन्हें ग्राम पंचायत जामगांव आर भेजा गया।
लेकिन जामगांव आर में पदभार ग्रहण करने से पहले ही 14 दिनों के भीतर उनका फिर से तबादला कर ग्राम पंचायत पहडोर भेज दिया गया। जैसे ही पहडोर में उनके पदस्थ होने की खबर पहुंची, वहां के सरपंच और ग्रामीणों ने भी विरोध शुरू कर दिया और तालाबंदी की चेतावनी दी।
स्थिति बिगड़ती देख 11 मार्च को जिला पंचायत सीईओ ने तीसरी बार आदेश जारी कर महेंद्र साहू को ग्राम पंचायत भरर में पदस्थ कर दिया। अब भरर में सचिव के पदस्थापना को लेकर विरोध शुरू हो गया है। अब देखना यह होगा कि उनका स्थानांतरण का सिलसिला समाप्त होता है या फिर दूसरे जगह स्थानांतरण होगा।
गौरतलब है कि जब महेंद्र साहू ग्राम धौराभांठा में पदस्थ थे, उस दौरान सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित हुआ था। वहीं पतोरा पंचायत में पदस्थ रहते हुए सरपंच के खिलाफ धारा 40 की कार्रवाई भी सामने आई थी। ऐसे में अब क्षेत्र में लोग तंज कस रहे हैं कि सचिव के साथ विवाद भी मानो ट्रांसफर होकर ही पहुंच जाते हैं।


