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लखनऊ।विवेकानन्द पॉलीक्लिनिक एवं आयुर्विज्ञान विज्ञान संस्थान एक 500 बिस्तरों वाला, एनएबीएच. मान्यता प्राप्त सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल एवं शिक्षण संस्थान है जिसमें 14 विषयों में डीएनबी,आठ विषयों में पैरामेडिकल कोर्स साथ ही नर्सिग संस्थान है जिसमें जीएनएम,बीएससी एवं एमएससी नर्सिंग कोर्स का संचालन होता है,जो पिछले आठ दशकों से लखनऊ एवं आसपास के क्षेत्रों तथा नेपाल तक के मरीजों को चौबिस घंटे आपातकालीन विभाग से संबद्ध एक नई ट्रॉमा सर्जरी यूनिट के साथ ही अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक सेवाएं प्रदान करता आ रहा है। विवेकानन्द पॉलीक्लिनिक एवं आयुर्विज्ञान विज्ञान संस्थान के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग द्वारा टीबी उन्मूलन की दिशा में निरंतर सराहनीय प्रयास किए जा रहे हैं।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ड्रग रेजिस्टेंट टीबी केयर के तत्वाधान में विवेकानन्द पॉलीक्लिनिक एवं आयुर्विज्ञान विज्ञान संस्थान व विवेकानन्द कॉलेज ऑफ नर्सिग,लखनऊ द्वारा “ टीबी मुक्त भारत ” अभियान के तहत 25-25 टीबी से पीड़ित मरीजों (कुल 50) को गोद लिया गया और उन्हें रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम,विवेकानन्द पॉलीक्लिनिक एवं आयुर्विज्ञान विज्ञान संस्थान लखनऊ के सचिव स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज द्वारा प्रत्येक मरीजों को पोषण पोटली लखनऊ के महानगर स्थित भाऊराव देवरस सिविल अस्पताल में प्रदान की गई। यह पोषण पोटली विवेकानन्द संस्थान के सहयोग से उपलब्ध करायी गयी। पोषण पोटली में मूंगफली भुना चना, गुण,सत्तू,तिल का गजक प्रत्येक एक किलोग्राम पोटली में था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य टीबी मरीजों को बेहतर पोषण सहायता प्रदान करना एवं उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ में सहयोग करना है। स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज ने कहा कि टीबी रोगियों के साथ किसी प्रकार का सामाजिक भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि आज भी टीबी रोगियों, विशेषकर महिलाओं एवं बच्चों, को सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है। उन्हें अकेला छोड़ दिया जाता है, वहीं टीबी से पीड़ित बच्चों के साथ अन्य बच्चे न तो बैठते हैं और न ही खेलते हैं। यह स्थिति मरीजों के हित में नहीं है, क्योंकि इससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जबकि उन्हें इस समय परिवार और समाज के सहयोग व हौसले की सबसे अधिक आवश्यकता होती है।
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