महाराष्ट्र में बीएमसी के साथ ही 29 नगर निकायों में चुनाव था, इसका महत्व स्थानीय निकाय चुनाव से ज्यादा नहीं है। हालांकि बीएमसी देश की सबसे बड़ी नगर पालिका है और कई छोटे राज्यों से ज्यादा का इसका बजट है। इस दिन भारतीय शेयर बाजार बंद होने को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई कि जिस चुनाव का देश भर से सीधा वास्ता नहीं उसके लिए शेयर बाजार को बंद कर देना कितना तर्क संगत है।
यही सवाल उठाया है ट्रेडिंग प्लेटफार्म जीरोधा के संस्थापक निथिन कामथ ने। उन्होंने एक्स पर अपनी पोस्ट में इसे ‘पुअर प्लानिंग’ का उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे फैसले वैश्विक निवेशकों के लिए भारत की विश्वसनीयता को प्रभावित करते हैं। उन्होंने अमेरिकी निवेशक चार्ली मुंगेर का हवाला देते हुए जोड़ा कि निर्णयकर्ताओं को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, इसलिए ऐसे फैसलों के खिलाफ आवाज कम उठती है।
कामथ का यह सवाल देश के आर्थिक परिप्रेक्ष्य में कितना जरूरी हो सकता है यह इसी से समझिए कि शेयर बाजार की एक दिन की छुट्टी न केवल घरेलू ट्रेडर्स को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसके दूरगामी प्रभाव होते हैं।
बढ़ती और सुगम होती तकनीक के कारण शेयर ट्रेडिंग अब घर घर तक पहुंच चुकी है। एनएसडीएल और सीडीएसएल के आंकड़ों के अनुसार देश में डीमेट खातों की कुल संख्या 21.59 करोड़ है। इससे एक बड़ी आबादी के आर्थिक हित सीधे तौर पर जुडे़ हैं।
शेयर बाजार की छुट्टियां वैश्विक निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत होती हैं। भारत जैसे उभरते बाजार में, जहां विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बड़ी भूमिका निभाते हैं, अप्रत्याशित या क्षेत्रीय कारणों से होने वाली छुट्टियां बाजार की तरलता को प्रभावित करती हैं। मुंबई नगर निगम चुनावों के कारण 15 जनवरी को बाजार बंद रहा, जबकि यह चुनाव मुख्य रूप से महाराष्ट्र तक सीमित था।
हाल के वर्षों में भारत ने खुद को एक वैश्विक निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने की कोशिश की है, लेकिन ऐसी छुट्टियां इस छवि को धूमिल करती हैं। उदाहरण के लिए अगर अमेरिकी या यूरोपीय बाजार खुले रहते हैं, तो एफआईआई यानी विदेशी निवेशक अपने फंड्स को अन्य बाजारों में शिफ्ट कर सकते हैं।
इसके विपरीत, 1 जनवरी को जब दुनिया भर के प्रमुख बाजार नए साल के जश्न के कारण बंद थे, तब भारतीय शेयर बाजार खुले रहे। तो सवाल यह भी है कि जब वैश्विक बाजार बंद थे तो भारत ने अपने शेयर बाजार खोल कर क्या खास हासिल कर लिया?
आर्थिक मोर्चे पर ऐसे फैसलों से भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ती है क्योंकि चीन या सिंगापुर जैसे बाजार न्यूनतम छुट्टियों के साथ संचालित होते हैं। वैश्विक निवेशकों के लिए, यह भारत को एक ‘फ्रंटियर इकोनॉमी’ की तरह दिखाता है, जहां पूर्वानुमानित नीतियां कमी हैं। सरकार और नियामकों को चाहिए कि छुट्टियों की सूची को अधिक वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाएं। क्षेत्रीय चुनावों के लिए पूरे बाजार को बंद करने की बजाय, डिजिटल ट्रेडिंग को प्रोत्साहित करें या वैकल्पिक व्यवस्था करें।
1 जनवरी जैसी मिसालें हमें आगे बढ़ाती हैं, लेकिन स्थानीय निकाय चुनाव जैसी छुट्टियां पीछे खींचती हैं। क्या इसे चुनाव प्रबंधन या महज प्रशासनिक कमी मानकर स्वीकार किया जा सकता है? वैसे भी शेयर बाजार सोमवार से शुक्रवार तक खुला रहता है और शनिवार, रविवार को बंद रहता है। हमारे पास बंदी के दो दिन पहले से निर्धारित हैं। ऐसे में मुंबई में चुनाव की तारीखें इन दिनों में रखने का विकल्प तो है ही।
बेहतर प्लानिंग से हम न केवल घरेलू ट्रेडर्स की रक्षा कर सकते हैं, बल्कि वैश्विक निवेशकों का विश्वास भी जीत सकते हैं। यह समय है कि भारत आर्थिक विश्वसनीयता को प्राथमिकता दे, ताकि हमारा बाजार सही मायने में वैश्विक बन सके।

