लेंस डेस्क | रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सोशल मीडिया हैंडल से शुक्रवार को धर्म स्वातंत्र्य विधेयक,2026 को लेकर एक ऐसी पोस्ट आई जिसकी राजनीतिक हलकों में तीव्र प्रतिक्रिया है।
दरअसल मुख्यमंत्री की इस पोस्ट में इस कानून को लेकर लिखा गया – ‘भगवान राम के ननिहाल, माता कौशल्या की पुण्यभूमि को विधर्मियों से मुक्त करने…’।
‘विधर्मियों से मुक्त करने’ वाली इस बात को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि इसका आशय क्या है?
राजनीतिक प्रेक्षक इस बात में पंक्तियों के बीच लिखी इबारत को पढ़ रहे हैं और सवाल कर रहे हैं कि यहां विधर्मी किन्हें कहा जा रहा है और जिनसे मुक्त करने की बात का इस पोस्ट में ज़िक्र है वह कथित मुक्ति किस तरह होने जा रही है?
दरअसल मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा अमल में लाए जा रहे इस कानून का प्रदेश में ही एक तबका, खासतौर पर मसीही समाज, खुलकर विरोध कर रहा है और इसे मसीही समाज को लक्षित कर लाया गया कानून बता रहा है।
खबर इतनी ही नहीं है। अब इस खबर से जुड़ी एक दिलचस्प बात और जानिए।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सोशल मीडिया हैंडल पर जो पोस्ट है उसे CMO छत्तीसगढ़, जो मुख्यमंत्री कार्यालय का ही सोशल मीडिया हैंडल है, ने ज्यों का त्यों शेयर किया है, बस ‘विधर्मियों’ से मुक्त करने वाली पंक्ति को संशोधित कर लिखा है– ‘धर्मांतरण के दंश से मुक्त कराने के लिए विष्णु देव सरकार लेकर आई है छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’।
सवाल उठ रहे हैं कि मुख्यमंत्री की पोस्ट जिसमें लिखा है ‘विधर्मियों से मुक्त करने’ की व्याख्या क्या है और अगर यह पंक्ति न्यायोचित है, कानून के अनुकूल है और संविधान सम्मत है, तो CMO छत्तीसगढ़ ने इसे शेयर करते हुए इस पंक्ति को क्यों हटा दिया और यदि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के हैंडल से प्रकाशित पोस्ट में ‘विधर्मियों से मुक्त करने’ वाली पंक्ति अनायास नहीं लिखी गई है तो इसके क्या कोई राजनीतिक मायने हैं?
कांग्रेस के एक नेता ने नाम ना प्रकाशित करने के आग्रह के साथ कहा कि अगर यह अनायास हुआ है तो मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया हैंडल संभालने वालों को ज़िम्मेदार ठहराया जाना चाहिए और यदि यह सायास है तो इसका मकसद और इस राजनीति को स्पष्ट करना चाहिए।


