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ईरान पर इजराइल और अमेरिका के हमले से शुरू हुए खाड़ी युद्ध के छह हफ्ते बाद भी शांति की राह नजर नहीं आ रही है, लेकिन चीन ने इस य़ुद्ध से उपजे तेल संकट के बीच हाइड्रोजन टर्बोप्रॉप इंजिन से चलने वाले एक मानवरहित कार्गो विमान का सफल परीक्षण कर लगता है, नया विकल्प तलाश लिया है। बेशक यह जरा महंगा है, लेकिन जिस तरह से खाड़ी युद्ध ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल की आवाजाही पर रोक लगा दी है, उसे देखते हुए इसकी व्यावहारिकता को खारिज भी नहीं किया जा सकता।
चीन के एयरो इंजिन कॉर्पोरेशन (एईसीसी) के मुताबिक यह परीक्षण हेनान प्रांत के जोझाउ में किया गया, जहां करीब साढ़े सात टन वजनी इस मानवरहित मालवाहकनुमा विमान ने 220 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से 36 किलोमीटर की दूरी 16 मिनट में तय की।
यों तो चीन लंबे समय से हाइड्रोजन ईंधन पर काम कर रहा है, लेकिन मेगावाट स्तर के हाइड्रोजन से चलने वाले टर्बोप्रॉप इंजिन का यह पहला सफल परीक्षण है। खास बात यह है कि इस इंजिन को चीन में ही विकसित किया गया है और इसे स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम बताया जा रहा है।
हालांकि यह पहला परीक्षण है और यह बताने की जरूरत नहीं है कि हाइड्रोजन ईंधन भले ही कार्बन उत्सर्जन रहित है, लेकिन यह अपेक्षाकृत काफी महंगा है। फिर भी, जिस तरह से खाड़ी युद्ध ने वैश्विक स्तर पर तेल का संकट पैदा कर दिया है, उसे देखते हुए इसे चीन का एक और ‘ग्रेट लीप फॉरवर्ड’ कह सकते हैं!
दरअसल तेल संकट के बीच हाइड्रोजन को वैकल्पिक इंधन के रूप में आजमाना कोई नई बात नहीं है। 1973 और 1979 के तेल संकट के दौरान जापान और अमेरिका जैसे देशों में हाइड्रोजन से चलने वाली कारों के विकल्प पर विचार किया गया था। हालांकि तेल के दाम गिरते ही इस ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
इसके उलट चीन लगातार हाईड्रोजन ईंधन पर काम कर रहा है। उसने नवीकरण उर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लक्ष्य के साथ बकायदा हाइड्रोजन इंधन के उत्पादन के लिए पांच साल (2026-2030) की योजना बना रखी है।
हालांकि इस राह में अभी अड़चनें हैं, लेकिन यदि इसे वैश्विक प्रतिस्पर्धा के रूप में देखें, तो चीन अभी इसमें सबसे आगे है।
जहां तक भारत की बात है, तो हम तेल और गैस के लिए खाड़ी और दूसरे देशों पर निर्भर हैं। हमारे यहां एक और मुश्किल यह भी है कि चीन से पारंपरिक प्रतिद्वंद्विता के बावजूद हमारा ध्यान नवोन्मेष और प्रौद्योगिकी पर अपेक्षाकृत कम है। हालत यह है कि हाल ही में अंतरराष्ट्रीय एआई समिट में खासी महंगी गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने चीन में बना एक रोबोट पेश कर खुद का बता दिया था!
बहरहाल, चीन पर नजर रखिए, उसके आसमान में जल्द ही उड़ते-फिरते मालवाहक ट्रक नजर आ सकते हैं!
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