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रायपुर। राजनांदगांव जिले के सोमनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में हुए विवाद के बाद प्रदेशभर के चिकित्सकों ने विरोध का रास्ता अपनाया है। चिकित्सकों ने काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया और मामले की निष्पक्ष जांच के साथ स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
चिकित्सकों का कहना है कि किसी भी घटना की वास्तविकता सामने आने से पहले किसी डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी को दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं है। उनका मानना है कि किसी भी विवाद या संभावित चिकित्सकीय त्रुटि की जांच वैज्ञानिक तथ्यों और स्थापित प्रक्रियाओं के आधार पर होनी चाहिए, न कि जनभावनाओं या दबाव के आधार पर।
इस संबंध में जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) छत्तीसगढ़ ने कहा कि हालिया घटनाक्रम में पर्याप्त तथ्यों के सामने आने से पहले ही जिस तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं, उससे चिकित्सा समुदाय में असुरक्षा की भावना बढ़ी है। संगठन का कहना है कि स्वास्थ्यकर्मी लगातार चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील परिस्थितियों में सेवाएं देते हैं, ऐसे में उनके सम्मान और सुरक्षा की भी रक्षा होना जरूरी है।
JDA ने प्रशासन से मांग की है कि सोमनी CHC प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। यदि जांच में कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए, लेकिन जांच पूरी होने से पहले किसी भी स्वास्थ्यकर्मी को सार्वजनिक रूप से दोषी घोषित न किया जाए।
चिकित्सकों ने यह भी स्पष्ट किया कि काली पट्टी बांधकर किया गया विरोध किसी व्यक्ति विशेष के समर्थन में नहीं है, बल्कि यह चिकित्सक समुदाय की सुरक्षा, गरिमा, निष्पक्ष जांच और न्यायपूर्ण प्रक्रिया के समर्थन में किया जा रहा है।
प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर अपनी एकजुटता दिखाई। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक कार्य वातावरण उपलब्ध कराना आवश्यक है।
फिलहाल चिकित्सा समुदाय की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई और जांच प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं। चिकित्सकों को उम्मीद है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाएगी और भविष्य में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
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