जम्मू विश्वविद्यालय का बड़ा फैसला, एमए राजनीतिक विज्ञान के सिलेबस से जिन्ना, सर सैयद और इकबाल के टॉपिक हटाने की सिफारिश

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Jammu University (जेयू) में एमए पॉलिटिकल साइंस के संशोधित सिलेबस से मोहम्मद अली जिन्ना, सर सैयद अहमद खान और मोहम्मद इकबाल से जुड़े विवादित हिस्सों को हटाने की सिफारिश की गई है। छात्रों के विरोध और प्रदर्शन के बाद विभागीय मामलों की समिति (DAC) ने रविवार को बैठक की और यह फैसला सर्वसम्मति से लिया।

नई शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत अपडेटेड सिलेबस में ‘माइनॉरिटीज एंड द नेशन’ पेपर के अंदर ‘मॉडर्न इंडियन पॉलिटिकल थॉट’ मॉड्यूल में जिन्ना को अल्पसंख्यकों के नेता के रूप में पेश किया गया था। पहले सिलेबस में उनका जिक्र मुख्य रूप से ‘टू-नेशन थ्योरी’ और भारत विभाजन के संदर्भ में होता था। इस बदलाव पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने आपत्ति जताई और कहा कि जिन्ना को अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधि बताना राष्ट्रीय भावनाओं के खिलाफ है।

शुक्रवार को ABVP ने कैंपस में प्रदर्शन किया, जिन्ना के पोस्टर फाड़े और चैप्टर हटाने की मांग की। विवाद बढ़ने पर विश्वविद्यालय ने प्रो. नरेश पाधा की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई।

रविवार को पॉलिटिकल साइंस विभागाध्यक्ष प्रो. बलजीत सिंह मान की अध्यक्षता में हुई बैठक में एकमत से फैसला हुआ कि एक वर्षीय एमए कोर्स के पेपर PIPSTC 102, दो वर्षीय एमए कोर्स के पेपर P2PSTC 302 से जिन्ना, सर सैयद अहमद खान (अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के संस्थापक) और अल्लामा इकबाल (पाकिस्तान के राष्ट्रीय कवि) से जुड़े टॉपिक्स हटा दिए जाएं। समिति ने कहा कि यह बदलाव पाठ्यक्रम को ज्यादा समकालीन और राष्ट्रीय दृष्टिकोण से जोड़ने के लिए है।

सिफारिश अब बोर्ड ऑफ स्टडीज (BoS) को भेज दी गई है। BoS की ऑनलाइन बैठक 24 मार्च को सुबह होगी, जहां अंतिम फैसला लिया जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद ही बदलाव लागू होंगे।

ABVP राज्य सचिव सन्नक श्रीवत्स ने कहा कि अकादमिक स्वतंत्रता के नाम पर ऐतिहासिक तथ्यों की अनदेखी नहीं हो सकती। जिन्ना का नाम केवल विभाजन और जम्मू-कश्मीर में अशांति से जुड़ा है। विभागाध्यक्ष प्रो. बलजीत सिंह मान ने पहले कहा था कि ये टॉपिक अकादमिक और UGC मानकों के अनुसार शामिल किए गए थे ताकि छात्र विभिन्न विचारों से परिचित हों। कांग्रेस JKPCC महासचिव नम्रता शर्मा ने कहा कि विवाद जानबूझकर खड़ा किया जा रहा है। यह हिस्सा 2025 के ड्राफ्ट में था लेकिन महीनों तक कोई विरोध नहीं हुआ।

यह जम्मू विश्वविद्यालय का पहला विवाद नहीं है। 2018 में भगत सिंह को लेकर और हाल ही में NCERT किताब में ज्यूडिशियरी पर टॉपिक को लेकर भी चर्चा हुई थी। अब 24 मार्च की BoS बैठक पर सबकी नजरें टिकी हैं।



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