जम्मू-कश्मीर में जनवरी के पहले पखवाड़े के दौरान 96 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है, जिससे घाटी में ठंड का असर बढ़ गया है और न्यूनतम तापमान फिर से शून्य से कई डिग्री नीचे चला गया है। मौसम विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बारिश और बर्फबारी की भारी कमी चिंताजनक स्थिति पैदा कर रही है। इसका सीधा असर कश्मीर की बागवानी पर पड़ सकता है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार मानी जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा मौसम परिस्थितियों के कारण फलों के पेड़ों में समय से पहले फूल आने की आशंका है। यदि फरवरी और मार्च में तापमान कम रहा, तो इन फूलों से फल बनने में दिक्कत आ सकती है, जिससे सेब सहित अन्य फसलों को भारी नुकसान हो सकता है।
आम धारणा के विपरीत, कश्मीर की अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत स्तंभ पर्यटन नहीं, बल्कि बागवानी है। ऐसे में मौसम की यह मार सीधे किसानों और फल उत्पादकों की आजीविका पर असर डाल सकती है।
उधर, 40 दिन तक चलने वाला कड़ाके की ठंड का दौर ‘चिल्लई कलां’ 30 जनवरी को समाप्त होने वाला है। यदि इसके खत्म होने तक व्यापक बर्फबारी नहीं होती है, तो आने वाली गर्मियों में पेयजल संकट के साथ-साथ खेती और बागवानी की सिंचाई के लिए पानी की भारी कमी का सामना करना पड़ सकता है। मौसम विशेषज्ञों ने इसे हाल के वर्षों की सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक बताया है।




