जंबूरी के लिए 11 हजार लाेगों को खाना तो 16,200 के लिए टेंट कैसे लगाए गए?

NFA@0298
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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बालोद में हो रही भारत स्काउट्स एंड गाइड्स की पहली राष्ट्रीय रोवर–रेंजर जंबूरी (Jamboree) को लेकर टेंडर प्रक्रिया के साथ ही अब हर प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। काम शुरू करने की टाइमिंग और बालोद जिला शिक्षा अधिकारी की तरफ से जारी वर्क ऑर्डर भी सवालों के घेरे में हैं।

दस्तावेज के मुताबिक टेंडर की गड़बड़ी का अलावा खाने और ठहरने के इंतजाम में भी गड़बड़ी की गई है। जंबूरी के लिए 11 हजार लोगों के खाने का इंतजाम किया गया है। वहीं रुकने के 16 हजार लोगों के लिए टेंट लगा दिए गए हैं। इतना ही नहीं सिर्फ टॉयलेट, बाथरूम में करीब 2 करोड़ खर्च कर दिए गए हैं।

अब टेंडर प्रक्रिया, दरों और काम शुरू होने के समय को लेकर भारी वित्तीय अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि सरकार और पार्टी के करीबी और पुराने ठेकेदार अमर भारत किराया भंडार के संचालक जसपाल को जंबूरी के बड़े काम पहले से फिक्स कर दिए गए।

टेंडर के दस्तावेजों पर नजर डालें तो रहने–खाने के आंकड़े भी हैरान कर रहे हैं। दस्तावेजों के अनुसार 16,200 स्काउट्स के लिए टेंट लगाए गए, जिनके लिए 1.43 करोड़रुपए वसूले गए, जबकि भोजन, नाश्ता और हाई-टी की व्यवस्था 11,000 स्काउट्स के लिए ही दिखाई गई। अब इस पर सवाल उठ रहा है कि जब भोजन की व्यवस्था 11 हजार लोगों के लिए की गई तो ठहरने पर अतिरिक्त खर्च क्यों?

इस कारनामें को लेकर अब तक जो तथ्य सामने आए हैं, उनके मुताबिक, जंबूरी स्थल पर टेंट, तंबू, लाइट, पानी और अन्य व्यवस्थाओं का काम पिछले दो महीनों से अमर भारत किराया भंडार कर रहा था। जबकि औपचारिक कार्यादेश (वर्क ऑर्डर) 5 जनवरी 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) बालोद ने जारी किया।

इस पूरी प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं कि टेंडर मिलने से पहले काम कैसे शुरू हो गया, जबकि अन्य निविदाकार एक्सिस कम्युनिकेशन और भारत किराया ने टेंडर से पहले कोई काम नहीं किया।

टॉयलेट्स पर 88 लाख, ‘पर्मानेंटसे भी महंगा!

टेंडर के संबंध में जो दस्तावेज सामने आए हैं, उसके मुताबिक जंबूरी के लिए 400 अस्थायी टॉयलेट बनाए गए, जिनकी दर 22,000 रुपए प्रति टॉयलेट तय की गई। यह टॉयलेट 5 दिन के लिए बनाए गए हैं। इस हिसाब से कुल 88 लाख रुपये का भुगतान सिर्फ टॉयलेट के लिए किया गया। जबकि इस तरह के प्रोजेक्ट पर काम करने वालों का कहना है कि इतनी राशि में स्थायी शौचालय बन सकते थे।

इतना ही नहीं, शौचालय, मूत्रालय और नहाने की 5 दिन की अस्थायी व्यवस्था के लिए 1.62 करोड़ रुपए चार्ज किए जाने का भी दावा किया गया है, जबकि पूरे टेंडर की राशि 5.18 करोड़ रुपए बताई जा रही है।

मामले में मांग की जा रही है कि वर्क ऑर्डर की तारीख, साइट पर काम शुरू होने के प्रमाण, दरों का तुलनात्मक विश्लेषण और भुगतान की पूरी फाइल सार्वजनिक की जाए। साथ ही स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराकर यह तय किया जाए कि राज्य के पैसे का दुरुपयोग हुआ या नहीं।

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