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रायपुर l छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 6 अप्रैल 2010 के सुकमा ताड़मेटला माओवादी हमले में 76 CRPF जवानों के शहादत वाले मामले में राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने दक्षिण बस्तर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के फैसले को बरकरार रखते हुए सभी आरोपितों को बरी करने का आदेश दिया।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने इस फैसले में जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी की। बेंच ने कहा कि इतने बड़े क्रूर हमले में इतने जवान शहीद हो गए, फिर भी अभियोजन पक्ष असली अपराधियों तक पहुंचने में पूरी तरह नाकाम रहा। यह स्थिति बेहद दुखद और चिंताजनक है।
निचली अदालत ने 7 जनवरी 2013 को साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपितों को बरी कर दिया था। राज्य सरकार ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने जांच की कमियों को इंगित किया, लेकिन कोर्ट ने पाया कि मजबूत और ठोस सबूतों की कमी के कारण अपील स्वीकार नहीं की जा सकती। हाईकोर्ट ने भविष्य में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में समय पर फोरेंसिक सबूत जुटाने और जांच को मजबूत बनाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं।
6 अप्रैल 2010 को दक्षिण बस्तर के ताड़मेटला इलाके में CRPF की 62वीं बटालियन और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम पर माओवादियों ने घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में 76 जवान शहीद हो गए थे। यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में माओवादियों द्वारा किया गया सबसे घातक हमलों में से एक था। यह फैसला छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की चुनौतियों और जांच एजेंसियों की तैयारियों पर एक बार फिर सवाल खड़े करता है।
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