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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा लाए गए ‘छत्तीसगढ़ शासकीय सेवक (सेवा संघ) नियम-2025-26’ के खिलाफ अनियमित कर्मचारियों ने तीखा विरोध जताया है। छत्तीसगढ़ प्रगतिशील अनियमित कर्मचारी फेडरेशन ने इस नियम को गैर-जरूरी और संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ बताया है। फेडरेशन का आरोप है कि सरकार इस नियम के जरिए अनियमित कर्मचारियों के आंदोलन को कुचलने का असफल प्रयास कर रही है।

फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल प्रसाद साहू ने कहा कि नए नियम में ‘शासकीय सेवक संघ’ की परिभाषा केवल नियमित कर्मचारियों तक सीमित कर दी गई है। इससे लाखों अनियमित कर्मचारियों आउटसोर्सिंग, ठेका, संविदा, दैनिक वेतनभोगी, मानदेय और जॉब दर पर काम करने वाले कर्मचारियों को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का मौका नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह नियम संविधान के अनुच्छेद 19(3) के विपरीत है, जो संघ बनाने और संगठन बनाने का अधिकार देता है।

अध्यक्ष गोपाल प्रसाद साहू ने मुख्यमंत्री से मांग की कि इस अनियमित कर्मचारी-विरोधी नियम को तुरंत निरस्त किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षित बेरोजगार युवाओं को बंधुआ मजदूर बनाकर रखना चाहती है, जबकि लाखों लोग मजबूरी में बेहद कम वेतन पर काम करने को विवश हैं। फेडरेशन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने नियम वापस नहीं लिया तो अनियमित कर्मचारी बड़े आंदोलन की तैयारी करेंगे।
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