Chiatanya Baghel Bail: छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को बड़ी राहत मिली है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने 2 जनवरी को उन्हें दो अलग-अलग मामलों में जमानत दे दी। इसके बाद आज शनिवार को चैतन्य बघेल रायपुर सेंट्रल जेल से रिहा हो गए। वे पिछले साल 18 जुलाई 2025 को अपने जन्मदिन पर गिरफ्तार हुए थे और करीब छह महीने जेल में रहे। जेल से बाहर आने पर चैतन्य ने कहा ‘मैं अदालत का शुक्रगुजार हूं कि मुझे न्याय मिला।’ उन्होंने द लेंस से ये भी कहा कि ‘अभी घर जा रहा हूं, परिवार के साथ समय बिताना है।’

जेल के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बड़ी भीड़ जमा थी। ढोल-नगाड़ों और फूल मालाओं के साथ कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। दिलचस्प बात यह है कि चैतन्य की रिहाई उनके बेटे के जन्मदिन पर हुई, जबकि गिरफ्तारी उनके अपने जन्मदिन 18 जुलाई पर हुई थी। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बेटे की रिहाई पर खुशी जताई और कहा, ‘सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन हार नहीं मानता। यह सत्य की जीत है।’ उन्होंने गिरफ्तारी को साजिश बताया और केंद्रीय एजेंसियों पर जांच के दुरुपयोग का आरोप लगाया। साथ ही कानून-व्यवस्था पर भरोसा जताया।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि पिछले कुछ सालों में ईडी जैसी एजेंसियों से विपक्षी नेताओं के खिलाफ गिरफ्तारियां बढ़ गई हैं। यह गलत और गैर-कानूनी लगता है। कई मामलों में सबूत नहीं मिलते, फिर भी लोगों को जेल भेज दिया जाता है। चैतन्य का मामला भी ऐसा ही है, दूसरी तरफ उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भूपेश बघेल के बयान पर कहा कि कानून पर भरोसा जताना अच्छी बात है। अदालत का फैसला सभी को मानना चाहिए और आगे की सुनवाई भी होगी।

कांग्रेस इस दौरान शक्ति प्रदर्शन करते हुए चैतन्य को गाजे बाजे फूल माला के साथ जेल परिसर से बहार लेकर आये, उन्हें लेने खुद भूपेश बघेल गाडी चलाते हुए बाहर लाये। इस दौरान भीड़ में धक्कामुक्की हुई, जेल परिसर का गेट भीड़ में खुल गया, पुलिस भी नहीं रोक पायी। इस दौरान एक रिपोर्टर के कैमरे का रिसीवर गिरा, एक महिला पत्रकार के सीने में दर्द हुआ और उन्हें हॉस्पिटल लेकर जाना पड़ा जबकि 3-4 कांग्रेसी प्रवक्ताओं के पॉकेट से पैसे चुरा लिए गए। इस दौरान पुलिस भी भीड़ को मैनेज नहीं कर पायी।
शराब घोटाले के आरोप 2019-2022 के दौरान लगे हैं, जब भूपेश बघेल की सरकार थी। ईडी और राज्य की एसीबी/ईओडब्ल्यू ने जांच की। ईडी का कहना है कि सिंडिकेट ने अवैध तरीके से करोड़ों रुपये कमाए। चैतन्य पर गंभीर आरोप हैं लेकिन हाईकोर्ट ने अन्य आरोपी जो जमानत पर हैं उनकी तुलना में उनका रोल कम बताया और जमानत दी। मामला अभी चल रहा है और जांच जारी है। यह घटना राज्य की राजनीति में फिर से गरमाई पैदा कर रही है। दोनों पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला अदालत करेगी।

