[ad_1]
नेशनल ब्यूरो। नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस BV नागरत्ना ने शनिवार को इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) जैसी संवैधानिक संस्थाओं को स्वतंत्र रूप से काम करना चाहिए और लोकतांत्रिक शासन की गरिमा को बनाए रखने के लिए उन्हें राजनीतिक प्रभाव से दूर रहना चाहिए।
पटना के चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में “अधिकारों से परे संवैधानिकता: संरचना क्यों मायने रखती है?” विषय पर आयोजित पहले डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्मारक व्याख्यान में बोलते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि संविधान ने जानबूझकर कुछ खास क्षेत्रों की देखरेख के लिए विशेष संस्थाएं बनाई हैं, जहां सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया शायद निष्पक्षता और जवाबदेही को पूरी तरह से सुनिश्चित न कर पाए।उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि ऐसी संस्थाएं स्वतंत्र रूप से काम करें और राजनीतिक प्रक्रियाओं से प्रभावित न हों।
लाइव लॉ के अनुसार जस्टिस नागरत्ना ने अनुच्छेद 324 के तहत भारत निर्वाचन आयोग के संवैधानिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि चुनाव केवल समय-समय पर होने वाली घटनाएं नहीं हैं, बल्कि वे एक ऐसा तंत्र हैं जिसके माध्यम से राजनीतिक सत्ता का गठन होता है। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया पर नियंत्रण ही वास्तव में एक लोकतंत्र में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा की शर्तों को निर्धारित करता है।
टी.एन. शेषन बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को एक अत्यंत महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था के रूप में मान्यता दी, जिसे चुनावों की निष्पक्षता सुनिश्चित करने का दायित्व सौंपा गया।
उन्होंने कहा, “चुनाव केवल समय-समय पर होने वाली घटनाएँ नहीं हैं; वे एक ऐसा तंत्र हैं जिसके माध्यम से राजनीतिक सत्ता का गठन होता है। हमारे संवैधानिक लोकतंत्र ने यह भली-भांति सिद्ध किया कि समय पर चुनाव होने के कारण सरकार में सत्ता का हस्तांतरण सुचारू रूप से होता है। इस प्रक्रिया पर नियंत्रण का अर्थ वास्तव में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा की शर्तों पर ही नियंत्रण रखना है।”
इस कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह, पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू (CNLU के कुलाधिपति), और कुलपति फैज़ान मुस्तफ़ा भी उपस्थित थे।
[ad_2]
Source link