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गिग मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा और उत्थान पर संगोष्ठी
12-Apr-2026 9:50 PM
देश में 80 लाख से अधिक और छत्तीसगढ़ में दो लाख गिग वर्कर
ई-श्रम पोर्टल में अब होने लगा गिग मजदूरों का भी पंजीयन
रायपुर, 12 अप्रैल। गिग श्रमिक यानी ओला, उबर, जोमेटो, रैपिडो, स्विगी, अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे संस्थानों में कार्य करने वाले जिन्हें कंपनियां अपना पार्टनर कहती है, लेकिन उनकी सुरक्षा औऱ सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति उदासीन रहती है। गिग मजदूरों के लिए आयोजित आज की यह संगोष्ठी उनके पुर्नउत्थान का शंखनाद है। गीग मजदूरों को आज यूनियन की जरूरत हैं, क्योंकि एकता ही शक्ति है। यह रविवार को महाराष्ट्र मंडल में आयोजित संगोष्ठी में भारतीय मजदूर संघ की अध्यक्ष शोभा सिंहदेव ने कहीं।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए शोभा सिंहदेव ने कहा कि कंपनियां ने इस शब्द की आड में बुनियादी सुविधाओं से दूर रखती है। इन्हीं सुविधाओं को उनसे लेने के लिए हमें संगठित रहना जरूरी है।
छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष योगेश दत्त मिश्रा ने कहा कि चार नये श्रम कानून ऐसे मजदूरों के हित में है।
कर्मकार मंडल के पूर्व अध्यक्ष मोहन एंटी ने कहा कि गिग वर्करों को अब ई-श्रम में पंजीयन का अधिकार है। पहले यह अधिकार नहीं था। श्रमिक पंजीयन के तहत दो लाख रुपये का बीमा भी आपका अधिकार है। वहीं किसी कंपनी द्वारा आईडी ब्लाक कर देने पर कंपनी के विरुद्ध सुनवाई का भी आपको अधिकार है। कंपनी के साथ होने वाले अनुबंध को अच्छे से पढ़े और समझे।
इससे पूर्व स्वतंत्र श्रमिक शोधार्थी सुश्री शुभांगी शुक्ला ने कहा कि राजस्थान, कर्नाटक, तेलंगाना जैसे राज्यों में गीग मजदूरों के लिए कानून बन चुके है। छत्तीसगढ़ में भी इसकी तैयारी कर चल रही है।
छत्तीसगढ़ शासन की मोर संगवारी प्रोजेक्टर के परियोजना प्रबंधक और महाराष्ट्र मंडल के परितोष डोनगांवकर ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी गीग श्रमिकों को बताया कि अब वे शासन की ई-श्रम पोर्टल पर अपना पंजीयन करा सकते है। अब पोर्टल में इसके लिए अलग से विकल्प दिया गया है। इसमें आपको अपनी कंपनी का नाम दर्ज करना होगा। इसके तहत आपको दो लाख का बीमा लाभ भी मिलता है।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष और समाजसेवी अजय मधुकर काले ने कहा कि आज की यह संगोष्ठी गीग मजदूरों की सफलता की पहली सीढ़ी है। संगठन की शक्ति ही सफलता दिलाएगी। इस दौरान छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल द्वारा 20 गिग मजदूरों को साइकिल खरीदने के लिए 3697 रुपये का चेक प्रदान किया गया।
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