गरियाबंद में नक्सल नेटवर्क पर बड़ा

NFA@0298
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गरियाबंद। जिला गरियाबंद में नक्सल उन्मूलन की दिशा में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। जनवरी 2024 से अब तक जिले में सक्रिय 07 शीर्ष नेतृत्व सहित कुल 31 माओवादियों को सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ों में मार गिराया है। वहीं, पिछले दो वर्षों में 29 माओवादियों ने पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की है।

पुलिस द्वारा जारी प्रेस-विज्ञप्ति के अनुसार, जनवरी 2025 में बेसराझर-भालूडिग्गी के पहाड़ी क्षेत्रों में चलाए गए विशेष अभियान में छत्तीसगढ़ में पहली बार माओवादियों के शीर्ष नेतृत्व को बड़ा झटका लगा। इस ऑपरेशन में सीसी-चलपति, एसजेडसीएम सत्यम गावड़े, जयराम उर्फ गुड्डू और आलोक सहित कुल 16 माओवादियों को मार गिराया गया।

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इसके बाद सितंबर 2025 में ग्राम मेटाल-भालूडिग्गी के पहाड़ों में चलाए गए एक और बड़े अभियान में माओवादियों के शीर्ष नेता सीसी मनोज उर्फ मोडेम बालाकृष्णना, एससीएम प्रमोद उर्फ पाण्डू और विमल उर्फ सुरेन्द्र उर्फ जाडी वेंकट समेत 10 माओवादी मारे गए। यह गरियाबंद जिले में दूसरी बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है, जिसने नक्सली संगठन की कमर तोड़ दी।

इधर, पुलिस की पुनर्वास नीति का भी सकारात्मक असर देखने को मिला है। 7 नवंबर 2025 को उदंती एरिया कमेटी और 19 जनवरी 2026 को एसडीके एवं सीनापाली एरिया कमेटी के सदस्यों ने पुलिस महानिरीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इसके अलावा 23 जनवरी 2026 को सीतानदी एरिया कमेटी ने धमतरी में आत्मसमर्पण कर धमतरी-गरियाबंद-नुआपाड़ा डिवीजन में नक्सल गतिविधियों के एक बड़े अध्याय का अंत कर दिया।

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इन सफलताओं के पीछे जवानों का विशेष प्रशिक्षण और सटीक रणनीति अहम भूमिका निभा रही है। जनवरी 2025 और सितंबर 2025 में चलाए गए विशेष प्रशिक्षण अभियानों ने सुरक्षा बलों की क्षमता को और मजबूत किया, जिससे ऑपरेशन अधिक प्रभावी हुए।

कुल मिलाकर, लगातार चल रहे अभियानों, आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के चलते गरियाबंद जिले में नक्सल नेटवर्क पूरी तरह कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। पुलिस का दावा है कि आने वाले समय में जिले को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में प्रयास और तेज किए जाएंगे।



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