गजा की 90% से ज्यादा आबादी मदद पर निर्भर, 44 दिनों में करीब 500 बार टूटा सीजफायर

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लेंस डेस्‍क। गाजा में 10 अक्टूबर से चला आ रहा युद्धविराम अब बुरी तरह चरमरा गया है। फिलिस्तीनी अधिकारियों के अनुसार, पिछले 44 दिनों में इजरायल ने 497 से ज्यादा हवाई और तोप के हमले किए हैं, जिनमें 342 से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। केवल शनिवार को ही एक दिन में 24 लोग मारे गए। गाजा की सरकार ने इन सभी मौतों की पूरी जिम्मेदारी इजरायल पर डाली है।

यूएनआरडब्ल्यूए ने चेतावनी दी है कि युद्धविराम के बावजूद गाजा में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। पट्टी की करीब 90% से ज्यादा आबादी पूरी तरह बाहरी मदद पर निर्भर है और ज्यादातर लोगों को दिन में सिर्फ एक बार ही खाना मिल पा रहा है। रोजाना औसतन सिर्फ 170 ट्रक ही गाजा में दाखिल हो पा रहे हैं, जो न्यूनतम जरूरत से काफी कम है।

इजरायल का दावा है कि शनिवार के हमले में उसने हमास के पांच वरिष्ठ कमांडरों को मार गिराया, क्योंकि एक हमास लड़ाके ने पहले इजरायली सैनिकों पर गोलीबारी की थी। हमास ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि इजरायल महज बहाने बना रहा है और जानबूझकर युद्धविराम तोड़ रहा है। हमास के वरिष्ठ नेता इज्जत अल-रिश्क ने साफ कहा कि युद्धविराम का उल्लंघन इजरायल की तरफ से ही हो रहा है।

जमीनी स्तर पर भी तनाव बढ़ा है। इजरायली सेना ने युद्धविराम समझौते में तय “येलो लाइन” को पार कर अपनी टुकड़ियों को आगे बढ़ा दिया है, जबकि उसे इस लाइन के पीछे रहना था।

इस बीच, इजरायल ने अब तक 330 फिलिस्तीनी शव गाजा को सौंपे हैं, लेकिन फोरेंसिक विभाग के पास पहचान के लिए जरूरी लैब और उपकरणों की कमी के कारण सिर्फ 90 शवों की ही पहचान हो पाई है।

ये हमले ऐसे वक्त हो रहे हैं जब गाजा के भविष्य को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई कवायद तेज हुई है। सोमवार को ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अमेरिका के उस प्रस्ताव को मंजूरी दी जिसमें गाजा में एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल तैनात करने और एक अस्थायी प्रशासन बनाने की बात है, जिसकी निगरानी खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करेंगे।

गाजा मीडिया ऑफिस का कहना है कि इजरायल युद्धविराम की दूसरी सबसे बड़ी शर्त यानी जरूरी मानवीय सहायता और दवाइयों की निर्बाध सप्लाई को भी लगातार रोक रहा है।

हमास हमले में खुफिया विफलता पर इजरायली अधिकारी बर्खास्त

दूसरी तरफ, इजरायल की सेना ने 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले में हुई खुफिया और परिचालन विफलताओं के लिए बड़ी कार्रवाई की है। सैन्य प्रमुख की मांग पर चली जांच के बाद तीन डिवीजन कमांडरों समेत कई वरिष्ठ जनरलों को बर्खास्त कर दिया गया है (हालांकि ये सभी पहले ही इस्तीफा दे चुके थे)।

नौसेना व वायुसेना प्रमुखों सहित कई अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कदम उठाए गए हैं। जांच रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि सेना में लंबे समय से सिस्टमैटिक खामियां थीं और उच्च गुणवत्ता वाली खुफिया जानकारी होने के बावजूद 7 अक्टूबर के हमले को रोकने में विफल रही।



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