पाटन/ ग्राम केसरा में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का समापन भक्ति, ज्ञान और श्रद्धा के माहौल में महाभंडारे के साथ हुआ। कथा के अंतिम दिन भगवताचार्य विष्णु अरोड़ा ने गीता सार का विस्तार से वर्णन करते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं को जीवन के महत्वपूर्ण संदेश दिए।
उन्होंने कहा कि गीता मनुष्य को बिना परिणाम की चिंता किए कर्म करने, मन को नियंत्रित रखने और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। भगवान श्रीकृष्ण के उपदेशों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि मनुष्य खाली हाथ आता है और खाली हाथ ही जाता है, इसलिए मोह-माया का त्याग कर सच्चे ज्ञान, भक्ति और निष्काम कर्म को जीवन का उद्देश्य बनाना चाहिए।
अरोड़ा जी ने कहा कि व्यक्ति को केवल कर्म करने का अधिकार है, फल पर नहीं। परिणाम की चिंता छोड़कर अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करना ही सच्चा धर्म है। उन्होंने यह भी बताया कि संसार परिवर्तनशील है—जो आज हमारा है, वह कल किसी और का था और भविष्य में किसी और का हो जाएगा, इसलिए परिवर्तन से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है।
कथा के दौरान उन्होंने आत्मा की अमरता, क्रोध के दुष्परिणाम और मन की चंचलता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि चंचल मन को नियंत्रित कर ही व्यक्ति जीवन में सफलता और शांति प्राप्त कर सकता है। साथ ही, इच्छा और लोभ का त्याग कर सभी के प्रति करुणा और निस्वार्थ प्रेम विकसित करने का संदेश दिया।
समापन अवसर पर महाभंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। महाप्रसाद वितरण की शुरुआत स्वयं भगवताचार्य अरोड़ा जी ने की।
कार्यक्रम में सरपंच ईश्वर निषाद, राजाराम सिन्हा, चंद्रशेखर सिन्हा, अशोक पटेल, कोमल सिन्हा, इंद्रेवर सिन्हा, कीर्ति सेन सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। वहीं भंडारे में राकेश यादव, कमलेश पटेल, राजाराम सिंह, तेजाराम सिन्हा, गजानंद ग्राम प्रमुख केसरा, लक्की सिन्हा, टीकाराम सिन्हा, पुनारद सिन्हा, सागर सिन्हा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों और युवा वर्ग ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
