नई दिल्ली। लोकसभा में सांसद सु्प्रिया सूले द्वारा पेश किया राइट टू डिस्कनेक्ट 2025 (Right to Disconnect Bill 2025) सोशल मीडिया पर जबरदस्त बहस का कारण बन गया है। जिस वक्त देश में कई कंपनियां कर्मचारियों के काम के घंटे बढ़ाने पर विचार कर रही हैं, नई कार्य संस्कृति विकसित की जा रही है। वर्क फ्रॉम होम का प्रचलन बढ़ा है उसी समय यह बिल ऑफिस के बाद मिलने वाले कॉल, मैसेज और ईमेल से कर्मचारियों को राहत देने की बात करता है। बिल का उद्देश्य लोगों की मानसिक सेहत और वर्क-लाइफ बैलेंस सुधारना है, लेकिन X पर इस प्रस्ताव को लेकर राय दो हिस्सों में बंट गई है कुछ ने तारीफ की, तो कई ने इसे निरर्थक बताया है।
इस बिल के मुताबिक-कर्मचारी ऑफिस टाइम के बाद कॉल, मैसेज या ईमेल का जवाब नहीं देगा तो यह अनुशासनहीनता या आज्ञा की अवहेलना माना जाएगा.कंपनियों को यह तय करना होगा कि ऑफिस टाइम के बाद काम की स्थिति में क्या नियम होंगे और इसके लिए क्या भुगतान होगा। इमरजेंसी जैसी स्थिति में ही कर्मचारी से संपर्क किया जा सकता है। आफ्टर-वर्क मेसेज का जवाब अगर कर्मचारी अपनी मर्ज़ी से देता है, तो उसे ओवरटाइम मिलना चाहिए. नियम न मानने पर कंपनियों पर कुल सैलरी का 1% जुर्माना लग सकता हैm डिजिटल डिटॉक्स सेंटर और काउंसलिंग की भी बात कही गई है. यह बिल 2019 में भी लाया गया था, लेकिन महामारी के बाद वर्क-फ्रॉम-होम कल्चर के बढ़ने के बीच यह मुद्दा चर्चा का विषय है।
बिल पेश होते ही X पर इसका बवंडर शुरू हो गया। कुछ यूज़र्स ने कहा, यह तो नारायण मूर्ति का सबसे बड़ा डर होगा! एक यूज़र ने लिखा जो भी ये ड्राफ्ट लिख रहा है, उसने यूरोप के नियम खूब पढ़े हैं। पर भारत जैसे भूखे देश में ऐसे नियम देश की ग्रोथ रोक देंगे. कुछ ने इसे ध्यान भटकाने वाला मुद्दा कहा। एक तरफ प्रदूषण, बेरोजगारी और उड़ानों में बाधा जैसे मुद्दे चल रहे हैं और यह नया बवाल शुरू हो गया। एक यूज़र का कहना था-कागज पर अच्छा लगेगा लेकिन असल जिंदगी में कौन है जो अपने बॉस के खिलाफ शिकायत करेगा?

