कफ सीरप की तस्करी के आरोपी बाहर, अमिताभ ठाकुर सलाखों में

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नेशनल ब्यूरो। नई दिल्ली

उत्तर प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में एक बार फिर हलचल मच गई है। पूर्व आईपीएस अधिकारी और आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर को लखनऊ पुलिस ने एक पुराने धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार कर लिया।

कोर्ट में पेशी के दौरान पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर।

यह गिरफ्तारी इतनी फिल्मी अंदाज में हुई कि सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो गया, जिसमें ठाकुर को ट्रेन से उतारते हुए दिखाया गया है। विपक्षी नेता इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं, जबकि पुलिस इसे आपराधिक मामले में कानूनी कार्रवाई। कोर्ट ने ठाकुर को 23 दिसंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जिससे मामला और तूल पकड़ रहा है।

हाल ही में कफ सिरप तस्करी सिंडिकेट पर उनकी मुखरता को भी इस गिरफ्तारी से जोड़कर देखा जा रहा है, जो उनके खिलाफ साजिश की आशंका को बल दे रही है।

ट्रेन की यात्रा के दौरान हुई गिरफ्तारी

मामले की शुरुआत मंगलवार रात हुई। अमिताभ ठाकुर लखनऊ से दिल्ली किसी जरूरी काम के सिलसिले में ट्रेन से यात्रा कर रहे थे। ट्रेन जैसे ही शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन पर रुकी, सादे कपड़ों में मौजूद लखनऊ पुलिस की स्पेशल टीम ने एसी कोच में घुसकर उन्हें बाहर निकाला।

रात के करीब 2 बजे की यह कार्रवाई इतनी अचानक थी कि पहले तो ठाकुर के सहयात्रियों ने इसे अपहरण समझ लिया। ठाकुर की पत्नी और सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर को तालकटोरा थाने के प्रभारी ने फोन कर सूचना दी।

नूतन ने बताया, “मुझे लगा कोई आपराधिक घटना हो गई है। आधी रात को ट्रेन में घुसकर उन्हें ले गए।” पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह गिरफ्तारी देवरिया जिले के एक 1999 के मामले से जुड़ी है, जिसमें ठाकुर पर औद्योगिक प्लॉट आवंटन में फर्जीवाड़े का आरोप है।

फर्जी दस्तावेज से जमीनी खरीदी का मामला

कोर्ट में पेशी के दौरान अमिताभ ठाकुर को ले जाती हुई पुलिस।

मामला 1999 का है, जब अमिताभ ठाकुर देवरिया के एसपी थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए एक औद्योगिक प्लॉट को फर्जी दस्तावेजों के जरिए हासिल किया। लखनऊ के राजाजीपुरम निवासी संजय शर्मा ने तालकटोरा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि ठाकुर ने सरकारी विभागों और बैंकों को गुमराह कर प्लॉट की खरीद-बिक्री की।

एफआईआर में धोखाधड़ी, जालसाजी और पद के दुरुपयोग के तहत धाराएं लगाई गईं। ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया था। लखनऊ पुलिस की पश्चिमी जोन एसआईटी ने जांच के दौरान पर्याप्त सबूत जुटाए, जिसके बाद गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ।

क्राइम ब्रांच का कहना है ठाकुर जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे। उन्हें सीतापुर-महोली बॉर्डर पर उन्हें हिरासत में लिया गया और देवरिया कोर्ट में पेश किया।

क्या है पूरा मामला

देवरिया वाले कथित भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं। 1999 में ठाकुर देवरिया एसपी के रूप में तैनात थे। आरोप है कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने फर्जी आवेदन पत्र, शपथ पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार कर एक औद्योगिक प्लॉट हासिल किया। शिकायतकर्ता संजय शर्मा का कहना है कि ठाकुर ने अपनी पत्नी के नाम पर प्लॉट लिया, लेकिन दस्तावेजों में झूठी जानकारी दी गई।

एसआईटी जांच में पता चला कि प्लॉट आवंटन के लिए सरकारी नियमों की अनदेखी की गई और बैंक से लोन लेने के लिए फर्जी प्रमाण पत्र इस्तेमाल किए गए। यह मामला 26 साल पुराना है, लेकिन हाल ही में एसआईटी ने नए सबूत जुटाए, जिसमें दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच शामिल है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ठाकुर ने पद पर रहते हुए जिला प्रशासन और औद्योगिक विकास निगम को गुमराह किया। यह भ्रष्टाचार का क्लासिक उदाहरण माना जा रहा है, जहां एक वरिष्ठ अधिकारी ने सिस्टम का दुरुपयोग किया। ठाकुर ने इन आरोपों को हमेशा खारिज किया है, इसे ‘राजनीतिक विद्वेष’ बताया।

बुधवार सुबह ठाकुर को देवरिया लाया गया। सीजेएम कोर्ट में पेशी के दौरान नाटकीय मोड़ आया। ठाकुर भावुक हो गए और कोर्ट में रोते हुए बोले, “जज साहब, मेरी हत्या की साजिश रची जा रही है। यह गिरफ्तारी मेरे बेटे के यूपीएससी इंटरव्यू को प्रभावित करने के लिए की गई है।”

वीडियो में उन्हें पुलिसकर्मियों द्वारा ढकेलते हुए जेल ले जाते दिखाया गया। कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। ठाकुर ने कोर्ट से सुरक्षा की मांग की, लेकिन फिलहाल उन्हें देवरिया जेल में रखा गया है।

कफ़ सिरप मामले में उठा रहे थे सवाल

इस गिरफ्तारी को ठाकुर की हालिया मुखरता से जोड़कर देखा जा रहा है, खासकर उत्तर प्रदेश में चल रहे कफ सिरप तस्करी सिंडिकेट मामले में। ठाकुर ने हाल ही में सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए इस सिंडिकेट पर सवाल उठाए थे।

उन्होंने आरोप लगाया कि अम्बरीश सिंह भोला जैसे लोग इस सिंडिकेट से जुड़े हैं और किंगपिन शुभम जायसवाल के साथ उनके लिंक हैं। ठाकुर ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी में उच्चाधिकारियों की मिलीभगत है, जो नेपाल और बांग्लादेश तक फैली है। उनकी यह मुखरता विवादास्पद साबित हुई, क्योंकि वाराणसी पुलिस ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की, उन्हें मानहानि का आरोपी बनाया।

ठाकुर ने कहा, “मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाता हूं, इसलिए मुझे फंसाया जा रहा है।” विपक्षी नेता इसे गिरफ्तारी का असली कारण मानते हैं, कि पुराने मामले को जिंदा कर ठाकुर को चुप कराने की कोशिश की गई। कफ सिरप मामला हाल ही में सुर्खियों में है, जहां यूपी एसटीएफ ने 37 लाख बोतलों की तस्करी पकड़ी, जिसकी कीमत 57 करोड़ रुपये है। ठाकुर की टिप्पणियों ने सरकारी अधिकारियों को असहज कर दिया, और अब उनकी गिरफ्तारी को इससे जोड़ा जा रहा है।

अखिलेश ने साधा योगी पर निशाना

यह गिरफ्तारी राजनीतिक रंग ले चुकी है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर योगी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, “जब भी कोई भाजपा सरकार की पोल खोलता है, तो ये भ्रष्ट सिस्टम पुराने मुद्दे निकालकर गिरफ्तारी करा देता है।

अमिताभ ठाकुर जैसे साहसी अधिकारी को चुप कराने की कोशिश हो रही है।” यादव ने इसे ‘लोकतंत्र पर हमला’ बताया और ठाकुर के समर्थन में रैली की घोषणा की। आजाद अधिकार सेना के कार्यकर्ताओं ने लखनऊ में विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें ‘अमिताभ को रिहा करो’ के नारे लगे। विपक्षी दलों ने इसे बदले की राजनीति’ करार दिया, जबकि भाजपा ने चुप्पी साध रखी है।

विवादों में रहे आईपीएस

IPS रहते हुए अमिताभ ठाकुर कई बार धरने पर बैठे चुुुके हैं।

अमिताभ ठाकुर का सफर हमेशा विवादों से घिरा रहा है। 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी के रूप में वे उत्तर प्रदेश पुलिस में चर्चित थे। 2013 में उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया। 2016 में वीआरएस लेने के बाद वे सामाजिक कार्यों में सक्रिय हो गए।

आजाद अधिकार सेना की स्थापना कर उन्होंने पुलिस सुधार और मानवाधिकारों पर आवाज उठाई। 2017 विधानसभा चुनाव में वे समाजवादी पार्टी से लखनऊ के सरोजिनी नगर से लड़े, लेकिन हार गए। उनकी पत्नी नूतन ठाकुर भी सामाजिक मुद्दों पर मुखर हैं। ठाकुर पर पहले भी कई मुकदमे दर्ज हुए, जैसे 2021 में बलात्कार पीड़िता की आत्महत्या मामले में गिरफ्तारी, लेकिन बाद में जमानत मिली। अब देवरिया भ्रष्टाचार मामला उनके करियर का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।

देवरिया एसपी ने साजिश से किया इनकार

वकीलों का कहना है कि मामला पुराना होने के बावजूद सबूत मजबूत हैं। पुलिस का कहना है कि यह राजनीतिक नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया है। देवरिया एसपी ने कहा, “कोई साजिश नहीं हो रही है , सिर्फ न्याय किया जा रहा है ।” हालांकि, ठाकुर के समर्थक इसे कफ सिरप मामले में उनकी मुखरता का बदला मानते हैं।

यह घटना उत्तर प्रदेश की सत्ता और विपक्ष के बीच तनाव को और बढ़ा रही है। ठाकुर के समर्थक उन्हें ईमानदार अधिकारी’मानते हैं, जबकि आलोचक ‘विवादास्पद। फिलहाल, जेल की सलाखों के पीछे से ठाकुर की आवाज सवालों का पुलिंदा लिए खड़ी है, और कफ सिरप सिंडिकेट पर उनकी टिप्पणियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं।





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