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लेंस डेस्क। गुजरात के स्थानीय निकाय चुनाव में आंनद क्षेत्र से अगर कांग्रेस एक भी उम्मीदवार जीतेगा तो विकास के नाम एक रुपया भी नहीं मिलेगा। यह विवादित बयान दिया है आनंद से बीजेपी सांसद मितेश पटेल ने। इस बयान के बाद वहां सियासी माहौल गर्म हो गया है। इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और मीडिया ने इसकी रिपोर्ट भी की है।
एक चुनावी सभा में बीजेपी सांसद मितेश पटेल ने मतदाताओं से कहा कि अगर उनके क्षेत्र से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का एक भी उम्मीदवार जीतता है, तो उनके विकास फंड से एक भी रुपया उस क्षेत्र में नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वे खुद यह सुनिश्चित करेंगे ताकि सबक सिखाया जा सके।
राजनीतिक विश्लेषकों और विपक्षी दलों ने यह भी याद दिलाया कि 2022 के चुनावों के दौरान भी मितेश पटेल का एक ऐसा ही वीडियो सामने आया था, जिस पर उस समय भी आलोचना हुई थी। विपक्ष का कहना है कि यह कोई जुबान फिसलने की घटना नहीं, बल्कि एक पैटर्न को दर्शाता है।
गुजरात में होने वाले ये चुनाव नगरपालिकाओं, तालुका पंचायतों और जिला पंचायतों के लिए हैं। ये संस्थाएं सरकारी अनुदान पर निर्भर रहती हैं और इन्हीं के जरिए सड़क, पानी, स्वच्छता, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसे काम होते हैं। ऐसे में वोट के आधार पर फंड रोकने की बात को सिर्फ बयान नहीं, बल्कि एक गंभीर चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।
कांग्रेस नेताओं ने इस बयान को खुला दबाव और मजबूत हाथ की राजनीति बताया है। इसे मतदाताओं को डराने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। आंकलाव से विधायक और गुजरात प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अमित चावड़ा ने मितेश पटेल के बयान पर मीडिया में प्रतिक्रया देते हुए कहा कि पार्टी चुनाव आयोग से शिकायत करेगी। उन्होंने कहा कि टैक्स के पैसे से मिलने वाली ग्रांट को रोकने की धमकी देना पूरी तरह से गलत है।
अब तक भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस बयान पर कोई विस्तृत सफाई नहीं आई है। इससे विवाद और गहरा गया है और यह मुद्दा चुनावी प्रचार का अहम हिस्सा बन गया है। गुजरात में जहां बीजेपी विकास और सुशासन के एजेंडे पर चुनाव लड़ रही है, वहीं विपक्ष इस मुद्दे को संस्थाओं के दुरुपयोग के उदाहरण के तौर पर पेश कर रहा है।
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